शिक्षा सेमिनार: इंडियन शेख अब्बासी अल्पसंख्यक महासभा ने दिया 'दीनी और दुनियावी' तालीम पर जोर, फिजूलखर्ची रोक बच्चों की पढ़ाई में लगाएं पैसा
(साबिर मोहम्मद रिपोर्ट)
गंगापुर सिटी/में सदर थाने के सामने स्थित हाजी फार्म हाउस पर 'इंडियन शेख अब्बासी अल्पसंख्यक महासभा' के तत्वाधान में एक भव्य शिक्षा सेमिनार का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का आगाज करते हुए अब्बासी समाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हाजी जमील खान अब्बासी ने कहा कि आज के दौर में हर मुसलमान को अपने बच्चों को दीनी (धार्मिक) और दुनियावी (आधुनिक) दोनों तरह की तालीम दिलानी चाहिए। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि केवल एक ही शिक्षा पर जोर देना और दूसरी को नजरअंदाज करना बेहद दुखद है। आज बच्चे अनुशासनहीन हो रहे हैं और मां-बाप की बातों को नहीं सुन रहे हैं, जिसे सुधारने के लिए बच्चों को अच्छे संस्कार देना बेहद जरूरी है।
धार्मिक संस्कार और बुजुर्गों का सम्मान:
हाजी जमील खान ने कहा कि दीनी तालीम से बच्चों में तहजीब, अनुशासन, बुजुर्गों का सम्मान और महिलाओं की इज्जत करने की सीख मिलती है। मुसलमान अपने बच्चों को कुरान-ए-करीम पढ़ाएं और पैगंबर मोहम्मद साहब के बताए रास्ते पर चलना सिखाएं। उन्होंने सभी समाजों से भी अपील की कि वे अपने-अपने धर्म के अनुसार बच्चों को धार्मिक और नैतिक शिक्षा दें, जिससे देश तरक्की कर सके।
शादियों में फिजूलखर्ची रोकें, बच्चों को पढ़ाएं:
उन्होंने समाज को फिजूलखर्ची से बचने का सख्त संदेश दिया। उन्होंने कहा कि शादियों में फिजूल खर्च बंद करें; चाहे मस्जिद में सादगी से निकाह करें या सामूहिक सम्मेलन में शादी करें, लेकिन जो पैसा बचे उसे बच्चों की उच्च शिक्षा पर लगाएं।
मासूम बच्चों ने दिया तालीम का संदेश:
सेमिनार में हाजी जमील खान के पोते और पोती—अब्दुल वहाब, अब्दुल हसीब, अदनान और आयत ने हिस्सा लिया। कक्षा 7 में पढ़ने वाले इन बच्चों ने कुरान-ए-करीम की तिलावत पेश करके समाज को शिक्षा का संदेश दिया। ये बच्चे मदरसा सलफिया के साथ-साथ पब्लिक स्कूल में भी आधुनिक शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
अंत में उन्होंने सभी मुस्लिम भाइयों से गुजारिश की कि बच्चों को तालीम दिलाकर उनकी सही तरबियत (पालन-पोषण व संस्कार) करना मां-बाप का फर्ज है। जब मां-बाप अपनी जिम्मेदारी पूरी करेंगे, तभी औलाद भी बड़े होकर मां-बाप की खिदमत और देखभाल का फर्ज निभाएगी। इसलिए वक्त रहते समाज को जागरूक होना पड़ेगा।