स्मार्ट मीटर की पूरी लागत उपभोक्ताओं से टैरिफ के माध्यम से वसूली जाएगी, इसलिए उपभोक्ताओं को यह जानने का पूरा कानूनी अधिकार है कि आखिर इन मीटरों की आवश्यकता क्या है। इन्हें किस तकनीकी आधार पर लगाया जा रहा है और स्वीकृत लागत से कहीं अधिक राशि पर ठेका क्यों दिया गया। यदि तकनीकी दृष्टि से मौजूदा डिजिटल मीटर पर्याप्त हैं, तो उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालकर स्मार्ट मीटर लगाने के लिए दबाव क्यों बनाया जा रहा है। इन्हीं गंभीर प्रश्नों को लेकर शनिवार को उपभोक्ता कल्याण मंच द्वारा होटल हमीर में स्मार्ट मीटर योजना के संबंध में एक पत्रकार वार्ता आयोजित की गई। इसमें मंच के मुख्य संरक्षक पूर्व आईएएस अधिकारी जेएम पठानिया, संयोजक कुलदीप सिंह खरवाड़ा, सह संयोजक एडवोकेट सुरेश राठौर, महासचिव जेके धीमान तथा विद्युत बोर्ड पेंशनर्स फोरम के जिला महासचिव विजय शर्मा उपस्थित रहे।