बारिश के बीच खेतों में पहुंचा कृषि अमला, जवाफुल धान की जैविक खेती और सन बीज उत्पादन पर जोर
लैलूंगा क्षेत्र में कृषि गतिविधियों और किसानों को मिल रहे योजनागत लाभों की जमीनी स्थिति जानने के लिए आज संयुक्त संचालक कृषि बिलासपुर श्री आऱ.के.राठौर एवं उपसंचालक कृषि श्री अनिल वर्मा ने संयुक्त भ्रमण किया। कृषि अधिकारियों ने किसानों के खेतों तक पहुंचकर फसल स्थिति का जायजा लिया और उन्नत एवं जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
भ्रमण की शुरुआत वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय लैलूंगा में कृषि विभाग के मैदानी अमले की बैठक से हुई। बैठक में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, एग्रीस्टैक, फसल स्थिति एवं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना सहित विभिन्न कृषि योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। संयुक्त संचालक श्री राठौर ने योजनाओं का शत-प्रतिशत क्रियान्वयन सुनिश्चित करने तथा पात्र किसानों को समय पर योजनाओं का लाभ दिलाने के निर्देश दिए।
जवाफुल धान की जैविक खेती का किया अवलोकन
बैठक के बाद बारिश के बीच कृषि अधिकारियों ने किसानों के खेतों का भ्रमण किया। इस दौरान लैलूंगा क्षेत्र में की जा रही सुगंधित जवाफुल धान की तकनीकी खेती का अवलोकन किया गया। अधिकारियों ने किसानों द्वारा अपनाई जा रही जैविक कृषि पद्धतियों, जीवामृत एवं हरी खाद के उपयोग की जानकारी ली और इन प्रयासों की सराहना की। श्री राठौर ने कहा कि लैलूंगा का जवाफुल धान अपनी विशिष्ट सुगंध और गुणवत्ता के कारण अलग पहचान रखता है। उन्होंने इसकी बाजार मांग और किसानों को मिलने वाले मूल्य में वृद्धि के लिए एनपीओपी के तहत जैविक प्रमाणीकरण कराने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैविक प्रमाणीकरण से उत्पाद को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और किसानों को प्रीमियम मूल्य दिलाने की दिशा में मदद मिलेगी।
सन बीज उत्पादन से आत्मनिर्भरता पर जोर
संयुक्त संचालक ने किसानों को सन बीज उत्पादन कार्यक्रम की जानकारी देते हुए इसकी खेती की तकनीक, बोनी की विधि एवं बेहतर उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि प्रबंधन के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को खेत की मेड़ों पर हरी खाद के बीज का उत्पादन करने के लिए भी प्रेरित किया, ताकि किसान स्वयं के स्तर पर गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार कर कृषि लागत कम करने के साथ बीज के लिए आत्मनिर्भर बन सकें।
एफपीओ के माध्यम से सामूहिक विपणन को बढ़ावा
श्री राठौर ने जवाफुल धान के उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाने तथा किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से सामूहिक विपणन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।