बिलग्राम में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, छात्राओं को महिला सुरक्षा और बाल अधिकारों की दी गई जानकारी
हरदोई। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, बिलग्राम में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, हरदोई की अध्यक्ष एवं जनपद न्यायाधीश रीता कौशिक तथा सिविल जज सीनियर डिवीजन एवं प्रभारी सचिव स्मिता गोस्वामी के निर्देशानुसार आयोजित शिविर में एसिड अटैक पीड़ितों के लिए कल्याणकारी योजनाओं, आपदा पीड़ितों को सहायता, कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, बच्चों के कानूनी अधिकार तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के संबंध में जानकारी दी गई।
तहसील विधिक सेवा समिति, बिलग्राम के सचिव एवं तहसीलदार दीपक गौतम के निर्देशानुसार आयोजित कार्यक्रम की संयुक्त अध्यक्षता तहसील प्रशासनिक अधिकारी साधना सिंह एवं विद्यालय की प्रधानाचार्य नीलू शर्मा ने की। शिविर में छात्राओं और विद्यालय के कर्मचारियों को उनके कानूनी अधिकारों तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रति जागरूक किया गया।
तहसील प्रशासनिक अधिकारी साधना सिंह ने एसिड अटैक पीड़ितों के लिए संचालित कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए बताया कि एसिड अटैक पीड़ितों को निःशुल्क चिकित्सा उपचार, मुआवजा तथा पुनर्वास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष, नालसा की मुआवजा योजना तथा राज्य सरकार की सहायता योजनाओं के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि ऐसी योजनाओं का उद्देश्य पीड़ितों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के साथ ही उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने में मदद करना है। इसके साथ ही आपदा पीड़ितों के लिए संचालित सहायता योजनाओं के महत्व पर भी प्रकाश डाला गया।
प्रधानाचार्य नीलू शर्मा ने कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने से संबंधित कानून की जानकारी देते हुए कहा कि महिलाओं के प्रति यौन उत्पीड़न सामाजिक भेदभाव का गंभीर रूप है। इसके कारण महिलाओं को कार्यस्थल पर कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उनके कार्य करने की क्षमता, अवसरों तथा तरक्की पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं को सुरक्षित कार्यस्थल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2013 में कानून लागू किया गया।
उन्होंने कहा कि महिला की इच्छा के विरुद्ध अनुचित तरीके से छूना या छूने का प्रयास करना, शारीरिक संबंध बनाने की मांग करना, यौन प्रकृति की टिप्पणियां करना, अश्लील सामग्री दिखाना अथवा ऐसा मौखिक, सांकेतिक या अन्य व्यवहार करना जिससे महिला की गरिमा प्रभावित हो, यौन उत्पीड़न के अंतर्गत आ सकता है। उन्होंने शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया और निर्धारित समयसीमा के संबंध में भी जानकारी दी तथा महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश दिया।
लीगल एड क्लीनिक से जुड़े आशीष तिवारी ने बच्चों के कानूनी अधिकारों एवं बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बाल विवाह के दुष्परिणामों तथा बच्चों को कानून के तहत प्राप्त अधिकारों के प्रति जागरूक करते हुए निर्धारित कानूनी प्रावधानों का पालन करने पर जोर दिया।
पीएलवी प्रमोद कुमार कुशवाहा ने निःशुल्क विधिक सेवाओं के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पात्र व्यक्तियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए विधिक सेवा प्राधिकरण कार्य करता है। उन्होंने नालसा की हेल्पलाइन संख्या 15100 के माध्यम से कानूनी सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई। साथ ही राष्ट्रीय लोक अदालत के आयोजन और इसके माध्यम से मामलों के निस्तारण की उपयोगिता के बारे में भी बताया।
कार्यक्रम में विद्यालय के समस्त कर्मचारीगण एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। शिविर का उद्देश्य छात्राओं और आमजन को कानून के प्रति जागरूक करना तथा जरूरतमंद लोगों तक निःशुल्क विधिक सहायता और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना रहा।
Bilgram, Hardoi | Oct 22, 2026