नाथद्वारा में सजी ‘लालबाग सांझी’, एक ही रचना में साकार हुईं श्रीकृष्ण की विविध ब्रज लीलाएं ।
आसोज कृष्ण दशमी पर कमल चौक में हुआ सांझी का मनोरम दर्शन, लालबाग से लेकर कालिया मर्दन और बकासुर वध तक के भावों ने मोहा वैष्णवों का मन
पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय की प्रधानपीठ श्रीनाथजी मंदिर की हवेली में आसोज कृष्ण दशमी के पावन अवसर पर मंगलवार को संध्या आरती दर्शनों के पश्चात कमल चौक में ‘लालबाग सांझी’ सजाई गई। सांझी में भगवान श्रीकृष्ण की विविध बाल एवं ब्रज लीलाओं को अत्यंत मनोहारी ढंग से भावपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया।
लालबाग सांझी में लालबाग की हरी-भरी छांव, श्री यमुना तट पर कालिया मर्दन, प्रभु श्रीनाथजी का श्री गिरिराजजी स्वरूप, वात्सल्य रस से परिपूर्ण माखन चोरी, ब्रज को आनंदित करने वाला श्रीकृष्ण जन्म तथा बकासुर वध जैसी लीलाओं को सांझी में साकार किया गया। सांझी की रचना में ब्रज की प्राकृतिक छटा और श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का सुन्दर भाव देखने को मिला।
सांझी में माखन चोरी की वात्सल्यपूर्ण लीला जहां नंद-यशोदा के स्नेह और बाल कृष्ण की चंचलता का भाव प्रस्तुत करती नजर आई, वहीं कालिया मर्दन में यमुना तट पर अधर्म के विनाश और प्रभु की दिव्य शक्ति का भाव उभरकर आया। इसी क्रम में श्रीनाथजी के श्री गिरिराजजी स्वरूप ने गोवर्धन धारण की लीला की स्मृति कराई।
वहीं श्रीकृष्ण जन्म के प्रसंग में ब्रज में छाए आनंद और उत्सव के भाव को दर्शाया गया तथा बकासुर वध की लीला में बाल गोपाल द्वारा ब्रजवासियों की रक्षा का अद्भुत प्रसंग प्रस्तुत किया गया।
संध्या आरती के बाद कमल चौक में सजी इस सांझी के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में वैष्णव पहुंचे। श्रद्धालुओं ने सांझी में साकार की गई ब्रज लीलाओं के दर्शन कर भक्ति, वात्सल्य और ब्रज रस का आध्यात्मिक अनुभव प्राप्त किया।