श्रीजी प्रभु में सांयकाल शयन दर्शन में 'नन्दलाल गजराज विराजत खेलन निकसे फाग' के पद के भाव से"फाग सवारी"के अलौकिक मनोरथ में मदन मोहनलाल प्रभु बिराजे कमल चौक में, तिलकायत श्री एवं श्री विशाल बावा व श्री लाल बावा ने फाग की सवारी में फूलों की फाग खिला कर प्रभु को लड़ाए लाड .....
सांयकाल शयन दर्शन में लाड़ले लाल प्रभु में तिलकायत श्री एवं श्री विशाल बावा व लाल बावा ने "मोर कुटीर" के मनोरथ में लालन के चबूतरे पर लाडले लाल प्रभु को मयूर सिंहासन पर विराजित कर अलौकिक मनोरथ सिद्ध किया....
पुष्टिमार्गीय प्रधान पीठ प्रभु श्री श्रीनाथजी की हवेली में अधिक मास की अधिक ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष पंचमी शुक्रवार के पावन एवं परम पवित्र अवसर पर, पूज्यपाद तिलकायत महाराज श्री की आज्ञा एवं श्री विशाल बावा एवं श्री लाल बावा की गरिमामयी उपस्थिति में श्रीजी प्रभु एवं श्री लाडले लाल प्रभु में निम्न मनोरथ सिद्ध किये गए। इन मनोरथ के अलौकिक अवसर पर तिलकायत महाराज श्री एवं गो.चि.105श्री विशाल बावा साहब एवं गो.चि.105श्री लाल बावा विशेष रूप से उपस्थित रहे व आप श्री ने प्रभु को लाड लड़ाकर प्रभु की आरती उतारी।वल्लभ कुल के पूज्य पुष्टिमार्गीय प्राकट्य स्वरूपों की पावन सन्निधि में..
सांयकालीन मनोरथ में शयन में श्रीजी प्रभु में 'नंदलाल गजराज विराजत खेलन निकसे फाग' के पद के भाव से"फाग सवारी"के अलौकिक मनोरथ में श्रीजी प्रभु के प्रतिनिधि ठाकुर श्री मदन मोहनलाल प्रभु को कमल चौक में चांदी के गजराज पर आम्बावाड़ी सिंहासन पर श्री मदन मोहन लाल प्रभु को विराजित कर फाग सवारी की अद्भुत सज्जा जिसमें असंख्य गोप गोपी, रंग-बिरंगे परिधान में सजी प्रभु की प्रिय सखियां अपने सिर पर सुवासित फूलों की डलिया लिए मानो प्रभु को फाग खिलाने को आतुर है,और प्रभु गजराज पर विराजित समस्त पुष्टि सृष्टि को फाग सवारी में फूलों की फाग खिला रहे हो ऐसा प्रतीत हो रहा है। वहीं हरी भरी छटा एवं सुवासित फूलों की सांझी व प्रभु के दोनों और चांदी की छतरियों में ऐसे प्रभु के दर्शन समस्त पुष्टि सृष्टि के वैष्णव जन को आनंदित कर रहे हैं।