औरैया DSO के कथित अभद्र ऑडियो से मचा बवाल, विभागीय कार्यशैली पर उठे सवाल
बैठक में न पहुंचने पर पूर्ति निरीक्षक को गाली और धमकी देने का आरोप, वायरल ऑडियो की निष्पक्ष जांच की मांग
राशन व्यवस्था की पारदर्शिता पर फिर उठे सवाल, विभागीय जवाबदेही की मांग तेज
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में खाद्य एवं रसद विभाग से जुड़ा एक कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के आचरण को लेकर बहस तेज हो गई है। वायरल ऑडियो में जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) राजेश कुमार द्वारा पूर्ति निरीक्षक समीर त्रिवेदी के साथ कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग करने और धमकी देने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, इस ऑडियो की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में इसकी सत्यता की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
बताया जा रहा है कि जिला पूर्ति अधिकारी ने सभी पूर्ति निरीक्षकों की बैठक बुलाई थी। आरोप है कि बैठक में उपस्थित न हो पाने पर संबंधित पूर्ति निरीक्षक को फोन कर कथित रूप से अपशब्द कहे गए और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई। ऑडियो वायरल होने के बाद विभागीय अनुशासन, प्रशासनिक व्यवहार और अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
खाद्य एवं रसद विभाग आमजन तक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से मुफ्त एवं रियायती राशन पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। ऐसे विभाग से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा असर जनता के विश्वास पर पड़ता है। पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश के विभिन्न जिलों से राशन वितरण में अनियमितता, कम तौल, शिकायतों के निस्तारण में देरी तथा कथित लेन-देन जैसे आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं। हालांकि प्रत्येक मामले की सच्चाई केवल निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकती है।
वायरल ऑडियो के बाद विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऑडियो वास्तविक है तो उसकी फॉरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए। साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि बातचीत किस परिस्थिति में हुई, कथित धमकी कितनी गंभीर थी और विभागीय नियमों का पालन हुआ या नहीं। इसके अलावा जिले की राशन वितरण व्यवस्था, ई-पॉश मशीनों की कार्यप्रणाली, निरीक्षण व्यवस्था तथा शिकायत निस्तारण प्रणाली की भी व्यापक समीक्षा की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार के विवादों की पुनरावृत्ति न हो।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध सेवा नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि जांच में आरोप निराधार पाए जाते हैं तो वास्तविक तथ्य भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए, जिससे भ्रम की स्थिति समाप्त हो और जनता का भरोसा कायम रहे।
सोशल मीडिया के दौर में किसी भी ऑडियो या वीडियो के वायरल होते ही जनचर्चा तेज हो जाती है, लेकिन प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तथ्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। यह प्रकरण केवल एक अधिकारी या कर्मचारी तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकारी विभागों में संवाद, अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता की भी याद दिलाता है।
🟥 सरकारी विभागों में शालीन व्यवहार, पारदर्शिता और जवाबदेही लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध शिकायत प्राप्त होती है तो उसकी निष्पक्ष, समयबद्ध और पारदर्शी जांच कर दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही विभागों में नियमित निरीक्षण, शिकायत निस्तारण प्रणाली को मजबूत करने तथा जनता के साथ सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करने की आवश्यकता है।
जनहित सुझाव
किसी भी वायरल ऑडियो या वीडियो को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक पुष्टि का इंतजार करें।
राशन वितरण से जुड़ी किसी भी अनियमितता की शिकायत संबंधित अधिकारियों एवं ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कराएं।
सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी जनता और अधीनस्थ कर्मचारियों के साथ मर्यादित एवं सम्मानजनक व्यवहार करें।
प्रशासन समय-समय पर राशन दुकानों, ई-पॉश मशीनों और निरीक्षण व्यवस्था का स्वतंत्र ऑडिट कराए।
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