कोरिया जिले के ग्राम पंचायत पतरापाली की निवासी साधना कुजूर आज ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की एक प्रेरणादायक मिसाल बन चुकी हैं। कभी गृहिणी के रूप में परिवार और कृषि कार्यों तक सीमित रही साधना कुजूर ने अपने परिश्रम, आत्मविश्वास और बिहान योजना के सहयोग से आर्थिक स्वतंत्रता की नई पहचान बनाई है।
पहले साधना कुजूर को आर्थिक संसाधनों की कमी और स्वयं का व्यवसाय शुरू करने में संकोच होता था। लेकिन राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
आज साधना कुजूर सिलाई, कपड़ा दुकान, दोना-पत्तल निर्माण और कृषि कार्य के माध्यम से प्रतिमाह लगभग 15,000 से 16,000 की नियमित आय अर्जित कर रही हैं। इस उपलब्धि ने उन्हें कोरिया जिले में 'लखपति दीदी' के रूप में पहचान दिलाई है।
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