'मां, अगली बार आऊंगा तो शादी की बात पक्की करूंगा': ड्यूटी पर जाने से पहले किया था वादा, असम विमान क्रैश में अलीगढ़ के जवान की मौत
मां, अपना ध्यान रखना। अगली बार छुट्टी पर आऊंगा तो बैठकर शादी की बात पक्की करेंगे। अभी लड़की देख ली है। ये आखिरी शब्द थे अलीगढ़ के जितेंद्र शर्मा के। असम में विमान क्रैश में अलीगढ़ के जितेंद्र शर्मा की मौत की खबर से बूढ़ी मां बेखबर है। भाइयों को 12 साल पहले पिता की मौत के बाद से डर है कि मां कहीं ये सदमा न बर्दाश्त कर पाए।
जितेंद्र एयरफोर्स में सार्जेंट थे। उन्होंने 5 दिन पहले ही छुट्टी के बाद ड्यूटी जॉइन की थी। दरअसल, शनिवार सुबह 10 बजे भारतीय वायुसेना का AN-32 परिवहन विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस हादसे में जितेंद्र के साथ 4 और लोगों की मौत हो गई थी। जितेंद्र का पार्थिव शरीर रविवार देर शाम तक आने की संभावना है।
अलीगढ़ के टप्पल इलाके के सालपुर गांव के रहने वाले जितेंद्र शर्मा (31) 7 भाई-बहन थे। वह अपने घर में सबसे छोटे थे। अभी घर में उनकी मां राजेश्वरी देवी के अलावा 2 बड़े भाई रमाकांत और भूपेंद्र रहते हैं। जितेंद्र का भारतीय वायुसेना में 1 जनवरी, 2015 को सिलेक्शन हुआ था। करीब 11 साल तक उन्होंने राष्ट्र सेवा की।
जितेंद्र के पिता करुआ शर्मा का 12 साल पहले निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद मां राजेश्वरी देवी ने सभी बच्चों का पालन-पोषण किया। घरवालों ने बताया-जितेंद्र हाल ही में छुट्टी लेकर गांव आए थे। 5 जून को वह ड्यूटी पर लौटे थे। घर में उनकी शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। उन्होंने शादी के लिए लड़की भी देखी थी। परिवार जल्द ही विवाह की तैयारियां शुरू करने वाला था, लेकिन इससे पहले ही हादसे में उनकी मौत हो गई।
72 वर्षीय बूढ़ी मां से छिपाया गया है कलेजे के टुकड़े का गम
जितेंद्र के बड़े भाई भूपेंद्र शर्मा ने कहा- मां पूछती है-आज जितेंद्र का फोन क्यों नहीं आया। तो मैंने कहा- वह जहाज पर ड्यूटी पर हैं, इसलिए व्यस्त हैं। मां राजेश्वरी देवी (72) को गहरे सदमे से बचाने के लिए पूरे गांव ने मिलकर इस दुखद खबर को उनसे छिपा रखा है। घर के भीतर महिलाओं के जाने पर रोक लगा दी गई है ताकि मां को भनक न लग सके।
चारों बहनें अपने-अपने घरों में सिसक रही हैं। उनका बस एक ही दर्द है- हम खुद को कैसे संभालें, कितनी देर अपने आंसू रोकें और मां को कैसे बताएं कि उनका लाडला अब इस दुनिया में नहीं रहा।
भाई को दूल्हा देखने का सपना रह गया अधूरा
बड़े भाई रमाकांत भारद्वाज ने बताया- अलीगढ़ की ही एक युवती से जितेंद्र के शादी की बात चल रही थी, जो चंडीगढ़ में प्रोफेसर हैं और एएमयू की छात्रा रही हैं। लंबे समय बाद जितेंद्र ने शादी के लिए हां की थी, जिससे पूरे परिवार में उत्साह था।
चारों बहनें इस बात से बेहद उत्साहित थीं कि वे अपने भाई को दूल्हे के रूप में देखेंगी और बारात धूमधाम से निकालेंगी, लेकिन बहनों का भाई के सिर पर सेहरा सजाने का सपना अब हमेशा के लिए अधूरा रह गया।