एक तरफ विकास के बड़े-बड़े दावे हैं…दूसरी तरफ अपनी संस्कृति और आयुर्वेद की ओर लौटने की बातें हैं…
लेकिन रुड़की में आयुर्वेद का इलाज करने वाला अस्पताल खुद व्यवस्था की बीमारी से जूझ रहा है।
पुरानी तहसील स्थित राजकीय आयुर्वेदिक अस्पताल का अपना भवन तक नहीं है। जर्जर इमारत में अस्पताल चल रहा है और रोजाना करीब 70 से 80 मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते हैं।
मरीज बीमारी लेकर आते हैं इलाज कराने…
लेकिन अस्पताल की हालत देखकर लगता है कि इलाज की जरूरत मरीजों से पहले इस भवन को है।
बरसात में जगह-जगह से पानी टपकता है। कर्मचारियों को काम करने में परेशानी होती है और इलाज कराने आने वाले मरीजों को भी अव्यवस्थाओं का सामना करना पड़ता है।
विडंबना देखिए…
जिस आयुर्वेद को स्वस्थ जीवन का रास्ता बताया जाता है, उसी आयुर्वेदिक अस्पताल की व्यवस्था ही बीमार पड़ी है।
अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी प्रदीप कुमार के मुताबिक भवन की समस्या को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों को बताया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।
सवाल ये नहीं कि आयुर्वेदिक अस्पताल में मरीज कितने आ रहे हैं…
सवाल ये है कि जब मरीजों की संख्या बढ़ रही है, तो अस्पताल की हालत कब सुधरेगी?
क्योंकि दवाइयां मरीजों का इलाज कर सकती हैं…
लेकिन जर्जर व्यवस्था का इलाज आखिर कौन करेगा?
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