समाहरणालय पूर्णिया
जिला जनसंपर्क कार्यालय
प्रेस विज्ञप्ति:- 870,
दिनांक:- 4 जुलाई 2026
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बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के 28वें स्थापना दिवस पर पूर्णिया जिला के एआरटी सेंटर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ0 सौरभ कुमार और सहयोगी संस्था ऐडेन्ट के कार्यक्रम प्रबंधक संजीत कुमार सिंह को किया गया सम्मानित:-
एड्स संक्रमित लोगों को आवश्यक चिकित्सकीय सहायता प्रदान करते हुए स्वस्थ्य और सुरक्षित करने के लिए पूर्णतः कार्यरत करता है एआरटी सेंटर पूर्णिया:-
•एचआईवी संक्रमित लोगों के उपचार के लिए सभी चिकित्सकीय सुविधा रहता है एआरटी सेंटर में :-
बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति, पटना द्वारा एड्स नियंत्रण के 28वें स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों में एड्स ग्रसित मरीजों की पहचान और नियमित उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूर्णिया जिला के राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (जीएमसीएच) में संचालित एआरटी सेंटर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ0 सौरभ कुमार और सहयोगी संस्था ऐडेन्ट पूर्णिया के कार्यक्रम प्रबंधक संजीत कुमार सिंह को सम्मानित किया गया।
दोनों स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मी को बुधवार को पटना के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण संस्थान द्वारा शेखपुरा के सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में बिहार राज्य एड्स नियंत्रण समिति के परियोजना निदेशक एवं अन्य अधिकारियों द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
एचआईवी संक्रमित लोगों के उपचार के लिए सभी चिकित्सकीय सुविधा रहता है एआरटी सेंटर में:-
एआरटी सेंटर चिकित्सक डॉ0 सौरभ कुमार ने कहा कि असुरक्षित यौन संबंध या ग्रसित व्यक्ति के मेडिकल किट्स के संपर्क में आने से कोई भी सामान्य व्यक्ति एड्स संक्रमण का शिकार हो सकता है।
खून जांच से ग्रसित व्यक्ति के ग्रसित होने की जानकारी प्राप्त होती है। इसके बाद ग्रसित व्यक्ति को चिकित्सक से संपर्क करते हुए उपलब्ध कराई जा रही दवा का नियमित सेवन से एड्स बीमारी को नियंत्रित रखा जा सकता है और ग्रसित व्यक्ति स्वस्थ्य जीवन का लाभ उठा सकते हैं।
डॉ0 सौरभ कुमार ने बताया कि एड्स बीमारी से सुरक्षा के लिए सामान्य लोगों को असुरक्षित यौन संबंध से सुरक्षित रहना चाहिए ताकि वे अपना स्वस्थ्य जीवन जी सकें।
एचआईवी से लड़ाई में एक दिन का भी रुकना हो सकता है खतरनाक : डॉ0 सौरभ कुमार:-
डॉ0 सौरभ कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं ने कई चुनौतियों का सामना किया है जैसे महामारी, संसाधनों की कमी, बढ़ता कार्यभार और दूरदराज क्षेत्रों में सेवाओं का बाधित होना।
इन परिस्थितियों ने एचआईवी टेस्टिंग, उपचार को प्रभावित किया है
इसलिए हमारा पहला दायित्व है कि हम किसी भी परिस्थितियों में सेवाओं की निरंतरता बनाए रखें।
इसमें टेस्टिंग आसान और सुलभ रहे, एआरटी दवाएं निर्बाध मिले, मरीज नियमित फॉलोअप में रहें और उन्हें मानसिक सामाजिक समर्थन मिलता रहे।
एचआईवी के प्रति हमारी प्रतिक्रिया को आज एक नए युग के अनुसार बदलने की आवश्यकता है।
परिवर्तन का अर्थ है - एचआईवी सेवाओं को टीबी, मातृत्व, किशोर स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना, डिजिटल हेल्थ, टेली-कंसल्टेंशन और समुदाय आधारित सेवाओं का उपयोग बढ़ना, पीईपी और नई उपकरण तकनीकों को अधिक लोगों तक पहुँचाना और सबसे महत्वपूर्ण मरीज केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना।
जब सेवाएं सामान्य, सहानुभूति और सुविधा के साथ दी जाती है तो मरीज उपचार से जुड़ा रहता है और बेहतर परिणाम मिलते हैं।
हमें यह संदेश हर मरीज और हर परिवार तक पहुँचाना चाहिए कि -
•एचआईवी एक प्रबंधनीय स्थिति है।
•एआरटी लेने वाला हर व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है और नियमित उपचार पर रहने वाला व्यक्ति वायरस नहीं फैलाता है।
समाज से यह बीमारी हटेगा तो लोग आगे आएंगे, एचआईवी टेस्ट करवाएंगे और बिना डर के उपचार करेंगे।
डॉ0 सौरभ कुमार ने कहा कि सभी स्वास्थ्य कर्मी मिलकर यह सुनिश्चित करें कि हर मरीज को गरिमा और गोपनीयता मिले, उन्हें सटीक जानकारी और सही दिशा निर्देश मिले और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा ग्रसित मरीजों की भावनात्मक जरूरतों को भी समझे।
एचआईवी से निपटने में सिर्फ दवाएं ही नहीं बल्कि हमारा व्यवहार और संवेदनशीलता को भी महत्वपूर्ण देते हुए उसका पालन करते हुए मरीजों को सुरक्षित रखें।
Information & Public Relations Department, Government of Bihar
Purnia, Bihar | Jul 4, 2026