औरंगाबाद में सरकारी व्यवस्था का इंतजार छोड़ ग्रामीणों ने खुद बना दी सड़क, कझवां गांव की एकजुटता बनी मिसाल।
वर्षों की परेशानी से निकला समाधान, निजी पैसे और आपसी सहयोग से ग्रामीणों ने उठाया सड़क निर्माण का बीड़ा।
औरंगाबाद (बिहार), 11 अक्टूबर
जब उम्मीदें सरकारी व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के दरवाजे पर दस्तक देते-देते थक जाती हैं, तब गांव के लोग खुद अपनी तकदीर लिखने के लिए आगे आ जाते हैं। ऐसा ही प्रेरणादायक उदाहरण औरंगाबाद जिले के ओबरा प्रखंड अंतर्गत अमिलौना पंचायत स्थित कझवां गांव में देखने को मिला है।
*रोजमर्रा की जंग बनी थी सड़क*
कझवां गांव की मुख्य संपर्क सड़क लंबे समय से बदहाल थी। गड्ढों से भरी, कच्ची सड़क पर पैदल चलना भी मुश्किल था। ग्रामीण बताते हैं कि बारिश के दिनों में तो स्थिति नारकीय हो जाती थी। घुटने भर कीचड़, फिसलन और जलजमाव के कारण स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी होती थी। बीमार लोगों को खाट पर लादकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता था। किसान अपनी उपज मंडी तक नहीं ले जा पाते थे।
ग्रामीणों ने कई बार मुखिया, विधायक से लेकर प्रखंड और जिला प्रशासन तक गुहार लगाई, आवेदन दिए, लेकिन आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला।
*फिर ग्रामीणों ने खुद संभाली जिम्मेदारी*
जब सरकारी फाइलों में सड़क का इंतजार लंबा होता गया, तो गांव के युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने बैठक की और एक बड़ा फैसला लिया - "अपनी सड़क खुद बनाएंगे।"
गांव के हर परिवार ने अपनी क्षमता के अनुसार 500 से 2000 रुपये तक का सहयोग दिया। किसी ने नगद, किसी ने ईंट-पत्थर, किसी ने श्रमदान किया। देखते ही देखते टोकरी, फावड़ा और कुदाल लेकर पूरा गांव सड़क पर उतर आया।
*एकजुटता बनी मिसाल, पर उठे सवाल भी*
कझवां के ग्रामीणों की यह पहल पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। यह कहानी सिर्फ एक सड़क बनाने की नहीं, बल्कि सामूहिक इच्छाशक्ति और एकजुटता की ताकत की है।
वहीं यह घटना शासन-प्रशासन पर बड़ा सवाल भी खड़ा करती है - आखिर 21वीं सदी में भी एक गांव को सड़क जैसी बुनियादी सुविधा के लिए खुद चंदा क्यों जुटाना पड़े? जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों की जिम्मेदारी कहां है?
*अब स्थायी निर्माण की मांग*
ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने जो सड़क बनाई है वह अस्थायी समाधान है। अब उन्हें सरकार से उम्मीद है कि इस पहल को देखते हुए प्रशासन कझवां गांव में पक्की, गुणवत्तापूर्ण और स्थायी सड़क का निर्माण कराएगा, ताकि बरसात में फिर से वही हाल न हो।
कझवां की यह कहानी उन सभी गांवों के लिए प्रेरणा है जो समस्याओं के सामने हार मान लेते हैं। ग्रामीणों ने साबित कर दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है।
Rafiganj, Aurangabad | Oct 11, 2026