नौ साल बाद श्रीनगर की सड़कों पर लौटी सिटी बस, मुख्यमंत्री धामी ने दिखाई हरी झंडी; महापौर आरती भंडारी का सपना हुआ साकार
‘श्रीनगर दर्शन’ नाम से शुरू हुई नगर निगम की सिटी बस सेवा, धारी देवी से कीर्तिनगर पुल तक दौड़ेगी 30 सीटर बस; न्यूनतम किराये पर मिलेगी सुविधा
श्रीनगर गढ़वाल। श्रीनगर की सड़कों पर एक बार फिर सिटी बस सेवा की शुरुआत हो गई है। करीब नौ साल के लंबे इंतजार के बाद शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर श्रीनगर नगर निगम की सिटी बस सेवा का शुभारंभ किया। महापौर आरती भंडारी की पहल पर शुरू हुई इस सेवा से शहरवासियों को आवागमन की बेहतर सुविधा मिलने के साथ ही स्थानीय परिवहन व्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। खास बात यह है कि इस सिटी बस का नाम 'श्रीनगर दर्शन' रखा गया है, जो शहर के लोगों और यहां आने वाले यात्रियों को श्रीनगर के विभिन्न क्षेत्रों से रूबरू कराएगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, महापौर आरती भंडारी और जिलाधिकारी पौड़ी स्वाति एस. भदौरिया ने संयुक्त रूप से बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लगभग 22 लाख 48 हजार 514 रुपये की लागत से शुरू की गई यह 30 सीटर बस धारी देवी से कलियासौड़ होते हुए कीर्तिनगर पुल तक संचालित होगी। शुरुआत में प्रतिदिन कम से कम पांच चक्कर लगाएगी। यात्रियों की सुविधा के लिए जल्द ही शहर में विभिन्न स्थानों पर सिटी बस स्टॉप भी बनाए जाएंगे।
महापौर आरती भंडारी ने बताया कि श्रीनगर में इससे पहले वर्ष 2017 तक सिटी बस का संचालन होता था। इसके बाद से शहरवासी इस सुविधा का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जब जनता के आशीर्वाद से उन्हें महापौर बनने का अवसर मिला था, तब उन्होंने सबसे पहले श्रीनगर में सिटी बस सेवा दोबारा शुरू करने का वादा किया था। आज यह सपना साकार हो गया है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत और जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया का आभार जताया।
उन्होंने बताया कि सिटी बस का न्यूनतम किराया निर्धारित किया गया है, जिससे आम जनता को किफायती दरों पर सफर की सुविधा मिल सके। सर्दियों में बस का संचालन सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक और गर्मियों में सुबह सात बजे से रात आठ बजे तक किया जाएगा। बस प्रतिदिन कम से कम पांच चक्कर लगाएगी। महापौर ने बताया कि शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए जल्द ही एक और नई सिटी बस उपलब्ध कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।