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जब मेहनत पर बरसी आफत, तब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बनी किसान श्री संजय सिंह का संबल
अतिवृष्टि ने छीनी खेतों की हरियाली, बीमा दावा राशि ने लौटाया भरोसा और नई शुरुआत का साहस
किसान के लिए उसकी फसल केवल अनाज नहीं होती, बल्कि उसके परिवार की उम्मीदें, बच्चों के सपने और पूरे वर्ष की आजीविका का आधार होती है। खेत में लहलहाती फसल देखकर किसान भविष्य के सुनहरे सपने बुनता है, लेकिन जब प्रकृति अचानक करवट बदल लेती है, तो उसकी वर्षों की मेहनत कुछ ही दिनों में मिट्टी में मिल जाती है। ऐसे ही कठिन दौर से गुजरे मुरैना जिले की पोरसा तहसील के ग्राम रजौधा निवासी किसान श्री संजय सिंह, जिनके लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना संकट की घड़ी में एक मजबूत सहारा बनकर सामने आई।
वर्ष 2025-26 में हुई अतिवृष्टि और जलभराव ने श्री संजय सिंह के खेतों में खड़ी फसल को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जिन खेतों में कुछ समय पहले तक हरियाली लहरा रही थी, वहां पानी भर गया और देखते ही देखते पूरी फसल नष्ट हो गई। अपनी आंखों के सामने महीनों की मेहनत को बर्बाद होते देख वे गहरे आर्थिक और मानसिक संकट में आ गए। उन्हें चिंता सताने लगी कि अब परिवार का खर्च कैसे चलेगा और अगली फसल की तैयारी के लिए संसाधन कहां से जुटेंगे।
इसी मुश्किल समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना उनके लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आई। योजना के अंतर्गत उन्हें 50 हजार रुपये की दावा राशि प्राप्त हुई।
श्री संजय सिंह बताते हैं कि यदि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिलता, तो फसल नुकसान से उबरना उनके लिए बेहद कठिन हो जाता। उनका कहना है कि यह योजना किसानों को केवल आर्थिक सुरक्षा ही नहीं देती, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में उन्हें मानसिक संबल और आगे बढ़ने का साहस भी प्रदान करती है। वे अन्य किसानों से भी आग्रह करते हैं कि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले संभावित नुकसान से बचाव के लिए अपनी फसलों का बीमा समय पर अवश्य कराएं।
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