शराबबंदी के बीच बिहार में बढ़ा 'सूखे नशे' का प्रकोप, युवाओं का भविष्य संकट में
पटना। बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद नशे के कारोबार और इसके स्वरूप में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। शराब पर कड़ी पाबंदियों के बीच राज्य में 'सूखा नशा' यानी स्मैक, ब्राउन शुगर, प्रतिबंधित कफ सिरप और सिंथेटिक ड्रग्स का जाल तेजी से फैल रहा है, जो युवाओं के भविष्य को दीमक की तरह चाट रहा है।
कभी बड़े शहरों तक सीमित रहने वाला यह खतरनाक जहर अब बिहार के गांव-गांव और गली-मोहल्लों तक पहुंच चुका है। शराब की दुर्गंध से बचने और पुलिस की कार्रवाई से छिपने के लिए युवा वर्ग इन जानलेवा केमिकल्स और ड्रग्स को विकल्प के रूप में अपना रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड्स के अनुसार, एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत दर्ज होने वाले मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि नशीले पदार्थों की तस्करी का दायरा कितना बढ़ चुका है। कागजी पाबंदियों के बीच नशे का यह बदलता ट्रेंड समाज, कानून व्यवस्था और पीड़ित परिवारों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है।
Hardoi, Hardoi | Sep 7, 2026