
लखनीपुर महेशपट्टी में मनरेगा के ₹3.21 लाख भुगतान पर उठे सवाल, मामला पहुंचा पटना; DRDA को 7 दिनों में दोबारा जांच का निर्देश.
समस्तीपुर। उजियारपुर प्रखंड के लखनीपुर महेशपट्टी पंचायत में मनरेगा योजना के तहत कथित अनियमितता और करीब 3.21 लाख रुपये के भुगतान से जुड़ा मामला अब राज्य स्तर तक पहुंच गया है। शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा का दावा है कि उन्होंने मामले से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज, ऑडियो रिकॉर्डिंग, कथित जाली हस्ताक्षर और बैंक स्टेटमेंट पटना में मनरेगा आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत किए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, इसके बाद समस्तीपुर DRDA को मामले की दोबारा सघन जांच कर 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
नाला उड़ाही के नाम पर भुगतान का आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि पंचायत में वाहा (नाला) उड़ाही के नाम पर बिना पर्याप्त भौतिक कार्य किए मनरेगा योजना से भुगतान किया गया। उनका दावा है कि पूर्व में AE सुधांशु कुमार और JE सचिन कुमार द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया, लेकिन मौके पर नाले की लंबाई, चौड़ाई और गहराई की वास्तविक मापी नहीं की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, निरीक्षण के दौरान JE के हाथ में फीता मौजूद था, लेकिन उससे नाले की वास्तविक माप नहीं ली गई। इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
कार्य अवधि को लेकर भी सवाल
शिकायतकर्ता के मुताबिक सरकारी रिकॉर्ड में कार्य अवधि 3 जून से 16 जून 2026 दर्ज है। उनका दावा है कि इस अवधि में वास्तव में काम होने को लेकर उनके पास उपलब्ध साक्ष्य सवाल खड़े करते हैं।
उनका कहना है कि 13 जून को प्रखंड के PO से हुई कथित बातचीत में कार्यस्थल पर काम नहीं होने की बात सामने आई थी। वहीं 21 जून के वीडियो में नाले में जंगल और घास दिखाई देने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि 8 जुलाई को जांच से पहले कार्यस्थल की सफाई कराई गई।
प्रवासी मजदूर के कथित जाली हस्ताक्षर का मामला
मामले में जॉब कार्डधारी प्रेमचंद सिंह के कथित जाली हस्ताक्षर का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, प्रेमचंद सिंह के जॉब कार्ड संख्या 4404 को उक्त कार्य में मजदूरी से जोड़ा गया, जबकि उनके द्वारा दिए गए स्व-घोषणा पत्र में कार्य अवधि के दौरान मध्य प्रदेश में रहने की बात कही गई है।
यदि जांच में हस्ताक्षर या भुगतान संबंधी आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी रिकॉर्ड और मनरेगा भुगतान प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता का मामला हो सकता है।
जांच के दौरान भुगतान पर भी सवाल
शिकायतकर्ता ने मनरेगा पोर्टल पर कार्य की स्थिति और बाद में हुए भुगतान को लेकर भी सवाल उठाया है। उनका दावा है कि CPGRAMS पर शिकायत और जांच प्रक्रिया के दौरान कार्य पोर्टल पर फ्रीज स्थिति में दिख रहा था, लेकिन इसके बावजूद 5 अगस्त 2026 को संबंधित जॉब कार्डधारकों के खातों में भुगतान किया गया।
मनरेगा आयुक्त के समक्ष साक्ष्य पेश करने का दावा
शिकायतकर्ता श्याम कुमार शर्मा के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को पटना स्थित पुराने सचिवालय में मनरेगा आयुक्त के समक्ष मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इनमें PO की कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग, मजदूर का शपथ पत्र, बैंक स्टेटमेंट सहित अन्य दस्तावेज शामिल थे।
शिकायतकर्ता का दावा है कि इन साक्ष्यों के आधार पर मनरेगा आयुक्त ने समस्तीपुर DRDA को मामले की दोबारा जांच कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अब DRDA की जांच रिपोर्ट पर नजर
राज्य स्तर से दोबारा जांच के निर्देश के बाद अब पूरे मामले में समस्तीपुर DRDA और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर नजर है। शिकायतकर्ता ने संबंधित कार्यक्रम पदाधिकारी, पंचायत रोजगार सेवक, JE, संबंधित जनप्रतिनिधि, ठेकेदार सहित अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में संबंधित अधिकारियों और अन्य आरोपित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 7 दिनों के भीतर DRDA की नई जांच रिपोर्ट क्या सामने लाती है और कथित मनरेगा भुगतान एवं दस्तावेजी अनियमितताओं के आरोपों पर जिला प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
#Samastipur #Ujiarpur #LakhanipurMaheshpatti #MGNREGA #MNREGA #ManregaGhotala #ManregaPayment #SamastipurNews #UjiarpurNews #DRDA #MGNREGAInvestigation #BiharNews #CorruptionNews #GovernmentScheme #RuralDevelopment #ShyamKumarSharma #StreamBihar