
जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका सशक्त बनाने को वैज्ञानिकों ने किया सर्वे, जैविक गांव व एग्रो टूरिज्म पर जोर
लखीसराय। जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कृषि आधारित आजीविका को सुदृढ़ करने और किसान परिवारों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शनिवार को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के वैज्ञानिकों की चार सदस्यीय टीम ने चानन प्रखंड के कछुआ, महजनवा और सतघरवा गांव का तकनीकी सर्वेक्षण किया। इस दौरान जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार, उप विकास आयुक्त सुमित कुमार सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान वैज्ञानिकों ने उच्च मूल्य वाली सब्जियों, मसालों, फलों तथा औषधीय एवं सुगंधित फसलों जैसे तुलसी, कालमेघ और लेमनग्रास की खेती को बढ़ावा देने की सिफारिश की। साथ ही कड़कनाथ मुर्गी पालन, मधुमक्खी पालन, मत्स्य पालन और एग्रो टूरिज्म को रोजगार के नए विकल्प के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया।
जिला पदाधिकारी ने कछुआ गांव में उत्पादित स्ट्रॉबेरी, फल एवं सब्जियों का जैविक प्रमाणन कराने, मिट्टी और उत्पादों की जांच कराने तथा गांव को जैविक ग्राम के रूप में विकसित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कछुआ को एग्रो टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने और ग्रामीण विकास के लिए विशेष रोडमैप तैयार करने पर भी जोर दिया।
टीम ने गांवों में पेयजल, सड़क, आंगनबाड़ी, राशन कार्ड, आवास और स्वास्थ्य सेवाओं की भी समीक्षा की। सतघरवा में मोबाइल टावर के लिए स्थल का निरीक्षण किया गया, जबकि महजनवा-सतघरवा मार्ग की खराब स्थिति को देखते हुए ग्रामीण कार्य विभाग को सड़क सुधार का निर्देश दिया गया।
जिला कृषि एवं उद्यान विभाग ने बताया कि क्षेत्र में पहले से स्ट्रॉबेरी, मशरूम, शेडनेट खेती और मधुमक्खी पालन जैसे नवाचार सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। किसानों को समन्वित कृषि और आधुनिक खेती का प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा।