
उदयपुर -किलाड़ बीएसएनएल फाइबर कार्य पर उठे सवाल: क्या करोड़ों की परियोजना में हो रही खानापूर्ति?
सुरेंद्र ठाकुर / Pangi Live News
पांगी/उदयपुर 13 जून 26
जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी को बेहतर दूरसंचार सेवाओं से जोड़ने के उद्देश्य से उदयपुर से किलाड़ तक फाइवर बिछाई गई थी अब उसी ऑप्टिकल फाइबर परियोजना की गुणवत्ता पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में निर्धारित तकनीकी मानकों और बीएसएनएल की गाइडलाइन का पालन नहीं किया गया, जिसके कारण आज भी शौर, पुर्थी और रेइ में बीएसएनएल की सुविधा नहीं मिल पाई है।
सामाजिक कार्यकर्ता एवं वरिष्ठ भाजपा नेता हरि ठाकुर लाहौल स्पीति ने आरोप लगाया कि जिस ठेकेदार द्वारा यह कार्य करवाया गया था , उसने भी केवल खानापूर्ति की है। उन्होंने कहा कि बीएसएनएल की ओर से ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार भूस्खलन संभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण, निर्धारित गहराई तक ट्रेंचिंग, सुरक्षित डक्टिंग, नालों और संवेदनशील स्थानों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था तथा गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इनमें से कई मानकों का पालन नहीं किया गया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि करोड़ों रुपये की इस परियोजना की गुणवत्ता सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है? उन्होंने मांग की कि कार्य की निष्पक्ष जांच हो और अगर गुणवत्ता में कोई कमी नजर आती है तो उन लोगों पर सख्त से सख्त कार्यवाही की जाए।
हरि ठाकुर ने यह भी कहा कि यह गंभीर विषय है और इसमें करोड़ों रुपए के घोटाला हुआ है जिसकी लिखित शिकायत भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, दूरसंचार मंत्री तथा सीबीआई निदेशक को लिखित रूप में भेज कर जांच कराई जाएगी
क्या कहती हैं बीएसएनएल की प्रमुख गाइडलाइन?
दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के दौरान सामान्यतः निम्न बिंदुओं का पालन किया जाता है—
मार्ग का विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण।
भूस्खलन और हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों से बचाव।
निर्धारित गहराई में ट्रेंच खोदकर एचडीपीई डक्ट बिछाना।
नदी-नालों और पुलों पर अतिरिक्त सुरक्षा प्रबंध।
चट्टानी क्षेत्रों में सुरक्षित पाइपिंग और प्रोटेक्शन।
केबल बिछाने के बाद गुणवत्ता परीक्षण एवं दस्तावेजीकरण।
भविष्य में सड़क चौड़ीकरण और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा सुनिश्चित करना।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन मानकों की अनदेखी की गई तो कुछ वर्षों में ही फाइबर नेटवर्क बार-बार क्षतिग्रस्त हो सकता है और घाटी को स्थायी कनेक्टिविटी का लाभ नहीं मिल पाएगा।
बिजली संकट पर भी लोगों का गुस्सा
पांगी से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं भानी चंद ने कहा कि एक ओर बीएसएनएल फाइबर कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं तो दूसरी ओर बिजली व्यवस्था भी बदहाल बनी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली बोर्ड की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है और बार-बार बिजली कटौती से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान गर्मियों में ही यदि यह स्थिति है तो सर्दियों के दौरान हालात और भी गंभीर हो सकते हैं। महालू नाला बंद होने से साच पावर हाउस प्रभावित होने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्थाओं को लेकर भी प्रशासन और विभाग की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
धनवास सोलर प्लांट की धीमी रफ्तार पर भी सवाल
स्थानीय लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार द्वारा पांगी क्षेत्र की ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए शुरू की गई धनवास सोलर प्लांट परियोजना अपेक्षित गति से आगे क्यों नहीं बढ़ रही है। लोगों का कहना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती तो घाटी को बिजली संकट से काफी राहत मिल सकती थी।
प्रशासन और विभाग से जवाब की मांग
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन, बीएसएनएल और बिजली बोर्ड से मांग की है कि उदयपुर -किलाड़ फाइबर परियोजना की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच करवाई जाए, कार्यस्थलों का निरीक्षण किया जाए तथा बिजली और संचार सेवाओं से जुड़े मुद्दों पर जनता के समक्ष स्थिति स्पष्ट की जाए।
पांगी घाटी के लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की परियोजनाएं केवल कागजों में नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर गुणवत्ता और जवाबदेही के साथ पूरी होनी चाहिए ताकि क्षेत्र को वास्तव में बेहतर संचार और बिजली सुविधाओं का लाभ मिल सके।
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