
गंगा के रास्ते सिमरिया पहुंचा 1668 मीट्रिक टन का मेगा कार्गो
कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना होकर औद्योगिक उपकरण सिमरिया पहुंचा
विस्तार प्रोजेक्ट के तहत दो यूनिट के लिए डेप्रोपेनाइजर व डीथेनाइजर जैसी विशाल इंडस्ट्रियल प्रोसेस यूनिट्स हैं शामिल
संवाददाता मुकेश कुमार बीहट
कोलकाता के डायमंड हार्बर बंदरगाह से रवाना 1668 मीट्रिक टन वजनी औद्योगिक उपकरण लेकर 713 किलोमीटर की दूरी तय करके तीन बड़े कार्गो जलयान भागलपुर से होते हुए शनिवार को सिमरिया पहुंचा. जानकारी के अनुसार इसमें बरौनी रिफाइनरी के विस्तार प्रोजेक्ट के तहत दो यूनिट के लिए डेप्रोपेनाइजर और डीथेनाइजर जैसी विशाल इंडस्ट्रियल प्रोसेस यूनिट्स शामिल हैं. इन भारी उपकरणों को सिमरिया हैं। इन भारी उपकरण को सिमरिया माध्यम से बरौनी रिफाइनरी तक ले जाया जाएगा. वहीं इतने भारी कार्गो को सुरक्षित रूप से मरांची से सिमरिया घाट तक लाने के लिए लगातार गंगा के जल सतह की निगरानी की जा रही है. प्राप्त जानकारी के अनुसार इतने भारी कार्गों को सुरक्षित रूप से गंगा में ले जाने के लीए पर्याप्त जलस्तर आवश्यक होता है. अधिकारियों की मानें तो जलयान के संचालन के लिए कम से कम 1.6 मीटर पानी की गहराई जरूरी होती है. वहीं प्राप्त जानकारी के अनुसार इससे पहले भी बरौनी रिफाइनरी के लिए जलमार्ग से भारी उपकरण पहुंचाए गए थे, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण औद्योगिक इकाइयों का परिवहन पहली बार किया जा रहा है.बरौनी रिफाइनरी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये उपकरण जानकारी के अनुसार मेगा कार्गो में बरौनी रिफाइनरी के विस्तार प्रोजेक्ट के तहत दो प्रोसेस यूनिटों
बरौनी रिफाइनरी के विस्तारीकरण के लिये दो यूनिट का उपकरण लेकर पहुंचा जलयान
के लिए डेप्रोपेनाइजर और डीथेनाइजर जैसे विशाल औद्योगिक उपकरण शामिल हैं. इन उपकरणों का उपयोग बरौनी रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने में किया जाएगा. इसके पहुंचने से रिफाइनरी के विस्तार कार्य में भी अब तेजी का विस्तार कार्य है विस्व तेजी से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि इस बार बरौनी रिफाइनरी के लिए जो उपकरण लाया जा रहा हैं, उनमें डेप्रोपेनाइजर, स्प्लिटर और डीथेनाइजर जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोसेसिंग यूनिट शामिल हैं. ये उपकरण रिफाइनरी की उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आधुनिक तकनीक के साथ ईंधन प्रसंस्करण को अधिक दक्ष बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे.
गंगा जलमार्ग से बढ़ रहा औद्योगिक परिवहन राष्ट्रीय जलमार्ग-1 पर भारी औद्योगिक उपकरणों का परिवहन बढ़ना इस बात का संकेत है कि गंगा अब केवल धार्मिक और पर्यटन गतिविधियों का माध्यम नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनती जा रही है. इससे सड़क परिवहन पर दबाव कम होने के साथ भारी मशीनरी के सुरक्षित और किफायती परिवहन को भी बढ़ावा मिल रहा है. आने
जानकारों के अनुसार डेप्रोपेनाइजर एक विशेष डिस्टिलेशन कॉलम होता है, जिसका उपयोग गैस मिश्रण या कच्चे तेल से प्रोपेन को अलग करने के लिए किया जाता है. इससे आगे की रिफाइनिंग प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है, वहीं स्प्लिटर एक विशेष आसवन इकाई है, जो मिश्रित हाइड्रोकार्बन को उनके क्वथनांक के आधार पर अलग-अलग उपयोगी उत्पादों में विभाजित करती है. जबकि डीथेनाइजर गैस मिश्रण से एथेन को अलग करने की प्रक्रिया में उपयोग किया जाता है. ये तीनों इकाइयां आधुनिक तेल रिफाइनरी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती हैं.
दुसिमरिया घाट से विशेष चोव ट्रकों के जरिये पहुंचेगा बरौनी रिफाइनरीमेगा कार्गो को सिमरिया घाट पर उतारने के बाद विशेष रूप से तैयार भारी क्षमता वाले ट्रकों के माध्यम से बरौनी रिफाइनरी तक पहुंचाया जाएगा. इसके लिए पहले से आवश्यक व्यवस्थाएं की जा रही है, ताकि उपकरणों को सुरक्षित तरीके से उनके निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जा सके.
वाले दिनों में सिमरिया गंगा घाट से आप जलमार्ग के रास्ते इलाहाबाद से लेकर हल्दिया तक की यात्रा कर सकेंगे.
इसके लिए सिमरिया गंगा तट पर कम्युनिटी जेटी बनाया जाएगा. इस जेटी के बन जाने से सिमरि गंगा तट पर छोटे-