
हाईकोर्ट का बड़ा अंतरिम आदेश, पांवटा साहिब के AVN RESORT से जुड़ा है मामला
पांवटा साहिब/शिमला। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने अश्वनी गोयल बनाम विजेश कुमार गोयल व अन्य मामले में एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए पांवटा साहिब स्थित M/s AVN Associates ( एवीएन रिसोर्ट के नाम से प्रसिद्ध ) की भंग हो चुकी साझेदारी के कारोबार को चलाने पर प्रतिवादियों को रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि प्रतिवादी न तो अपने नाम से और न ही भंग हो चुकी फर्म के नाम से इस कारोबार को चला सकेंगे। आदेश में एक अन्य फर्म M/s S “N” V Food (एसएनवी फ़ूड कॉर्नर के नाम से प्रसिद्ध )के नाम से कारोबार चलाने पर भी रोक लगाई गई है। 1 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में मुकदमे के लंबित रहने तक संबंधित फर्म की गुडविल (व्यावसायिक ख्याति), संपत्ति, पूंजी, चल संपत्ति और व्यावसायिक सामग्री के इस्तेमाल पर भी रोक लगाई है।
क्या है पूरा मामला?
अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेजों के अनुसार, वादी अश्वनी गोयल और प्रतिवादी संख्या 1 व 2 के बीच 27 अगस्त 2014 को एक अपंजीकृत 'रिटायरमेंट कम पार्टनरशिप डीड' के तहत साझेदारी व्यवसाय स्थापित किया गया था। इस फर्म का नाम M/s AVN Associates था, जिसका कार्यालय NH-73-A, यमुनानगर रोड, बाता मंडी, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर में स्थित है। यह साझेदारी मुख्य रूप से इवेंट मैनेजमेंट से संबंधित व्यवसाय के लिए गठित की गई थी। इसमें शादी समारोह, पार्टियां, विभिन्न आयोजन, व्यावसायिक बैठकें और ठहरने की व्यवस्था जैसी गतिविधियां शामिल थीं। साझेदारी विलेख के अनुसार, व्यवसाय के लाभ और नुकसान में तीनों साझेदारों की बराबर हिस्सेदारी थी। अदालती आदेश के मुताबिक, आपसी मतभेदों के बाद साझेदारी समाप्त हो गई। वादी ने अदालत में मुकदमा दायर कर साझेदारी भंग होने की घोषणा की मांग की। वादी का पक्ष था कि प्रतिवादी इसके बावजूद साझेदारी व्यवसाय चला रहे थे, जिसके चलते अंतरिम निषेधाज्ञा की मांग की गई।
अदालत ने क्यों लगाई रोक?
उच्च न्यायालय ने रिकॉर्ड पर मौजूद साझेदारी विलेख, विघटन संबंधी दस्तावेजों और कानूनी नोटिसों का अवलोकन किया। आदेश में कहा गया कि उपलब्ध सामग्री से साझेदारी भंग होने का संकेत मिलता है और वादी की ओर से इस संबंध में सार्वजनिक नोटिस तथा कानूनी नोटिस भी जारी किए गए थे। अदालत ने भारतीय साझेदारी अधिनियम, 1932 की धारा 53 में दिए गए प्रावधान का उल्लेख करते हुए अंतरिम राहत प्रदान की। इस प्रावधान के तहत, साझेदारी भंग होने के बाद और किसी विपरीत समझौते के अभाव में, साझेदार फर्म के नाम से कारोबार करने या उसके किसी भी हिस्से की संपत्ति का निजी लाभ के लिए इस्तेमाल करने पर रोक लगाने की मांग कर सकता है, जब तक फर्म के कामकाज का समापन नहीं हो जाता।
किन संपत्तियों पर लागू होगा आदेश?
अदालत का अंतरिम आदेश बाता मंडी, तहसील पांवटा साहिब, जिला सिरमौर में स्थित उस भूमि और संपत्ति से संबंधित है, जिसका विवरण खेवट नंबर 259/232, खतौनी नंबर 410/361 तथा खसरा नंबर 439, 440, 441, 442 और 444 के रूप में दिया गया है। आदेश में इन पांच खसरों का कुल क्षेत्रफल 00-76-41 हेक्टेयर दर्ज है।
न्यायालय ने यह भी कहा कि साझेदारी भंग होने के साथ उससे जुड़ा लाइसेंस भी समाप्त हो गया है। प्रतिवादियों को मुकदमे के लंबित रहने तक भंग फर्म की व्यावसायिक ख्याति, पूंजी, संपत्ति और अन्य व्यावसायिक सामग्री का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
आगे क्या होगा?
अदालत ने संबंधित आवेदन पर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं, जिसे जवाब सहित 14 मार्च 2027 को वापस प्रस्तुत किया जाना है। नोटिस जारी करने से पहले आवश्यक प्रक्रिया एक सप्ताह के भीतर पूरी करने को कहा गया है। अंतरिम आदेश सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 39 नियम 3 के अनुपालन के अधीन है। हालाँकि यह आदेश अंतरिम प्रकृति का है। साझेदारी से संबंधित विवाद और वाद में उठाए गए मुद्दों पर अंतिम निर्णय मुकदमे की आगे की कार्यवाही के दौरान होगा , अश्वनी गोयल के बेटे साहिल गोयल ने बताया की उन्होंने वर्ष 2024 में भी समाचार पत्रों के माध्यम से सूचना दी थी जिसमे M/s AVN Associates के भंग होने का हवाला दिया गया था ,उन्होंने कहा का यदि कोई भी इस फर्म के साथ लेनदेन रखता है तो यह उनका अपना जोखिम होगा