Public App Logo
Profile Picture

RAJESH KUMAR

@journalistrajeshpdev
90Followers
0Following
"वो यादों के मंज़र वो माज़ी की बातें"

मनमोहन सिंह 'दानिश' 

कल 10 अक्टूबर को पांवटा साहिब में हमारे प्रोफेसर संतोष कुमार का 95 वां जन्म दिवस मनाया गया। अतीत की सभी बातें मेरे मानसपटल पर किसी चलचित्र के तरह उभर आईं। मेरे लिए गौरव की बात थी कि जिस महान शख्सियत को लोग उनके गुज़र जाने के 13 साल बाद भी याद कर रहे थे मेरा उनसे बहुत करीबी रिश्ता रहा था। उन्होंने मुझे डिग्री कॉलेज सोलन में पढ़ाया था। उनकी बहुआयामी शख्शियत के सभी लोग कायल थे। आज के समय में जब लोग अपने माता पिता के गुज़र जाने के दो चार साल के बाद ही उन्हें भुला देते हैं तो उनके छात्रों, उनके दोस्तों, और चाहने वालों ने उन्हें उनके जाने के 13 साल बाद भी याद रक्खा यह उनकी शख्शियत को दर्शाता है। असल में लोग उन्हें उनके बहुआयामी व्यक्तित्व के लिए और समाज के लिए किये गए उनके कामों के लिए याद रखे हुए हैं। 
इस सारे आयोजन का अगर श्रेय किसी को जाता है तो वह है उनका छात्र राजेश कुमार। लोग संतोष सर को याद तो करते हैं पर उन सब को इकट्ठा करना और फिर एक कार्यक्रम आयोजित करना, और उनके जीवन को दर्शाती एक स्मारिका निकलना केवल राजेश की अपने गुरू को सच्ची श्रद्धांजलि है। इसके साथ ही राजेश ने हम लोगों को इसमें शामिल किया। कुछ लोग सोलन से भी पहुंचे थे।
सच्च पूछो तो उस लगभग तीन घंटे तक चले कार्यक्रम के तहत मैं अपनी किशोर अवस्था में ही रहा। डिग्री कॉलेज सोलन के क्लास रूम्स, संतोष सर का पढ़ना, उनकी डांट, उनका प्यार, उनकी बच्चों जैसी उन्मुक्त हसीं सब मेरे जहन में चलते रहे। मुझे लगता है कि आज भी हमें उनके मार्गदर्शन की उतनी ही ज़रूरत है जितनी उस समय थी। आज वे हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका स्वाभिमान, उनकी बेवाक बातें और "रात को रात" कहने का हौसला आज भी हमें प्रेरित करता है। मुझे नहीं पता कि आदमी की सफलता का पैमाना क्या है? क्या अकूत धन संपत्ति, जुटाने वाला सफल है या शिक्षा का दान देने वाला? पर मेरे लिए उससे बढ़ कर कोई नहीं जो आदमी को इंसान बना दे। और यह काम कोई शिक्षक ही कर सकता है। आज मुझे बचपन में देखी वी शांता राम की फिल्म "दो आंखें बारह हाथ" का अंतिम सीन याद आता है जब फिल्म का नायक छह डाकुओं को सुधार देता है लेकिन खुद ज़िंदा नहीं रहता। पर डाकू उस आज़ाद नगर को छोड़ कर नहीं जाते और उन्हें लगता कि "बाबू जी" की दो आंखें उन्हें अभी भी आसमान से देख रही हैं कि वे क्या कर रहे हैं। शायद संतोष कुमार सर की की नज़रें भी हम पर हों कि हम क्या कर रहें हैं। बस अंत में इतना ही कहना चाहता हूं:

" नमी आँखों में है सब के अभी बरसात बाकी है 
चिरागों को न बुझने दो अभी तो रात बाकी है"
कांग्रेस के युवा नेता अवनीत सिंह लाम्बा ने किया ‘संघर्ष से शिखर तक’ स्मारिका का विमोचन

पांवटा साहिब। सरस संस्था के संस्थापक स्वर्गीय प्रोफेसर संतोष कुमार की 94वीं जयंती के अवसर पर पांवटा साहिब स्थित वीआईपी रिसोर्ट में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उनकी पुण्य स्मृति में तैयार की गई स्मारिका ‘संघर्ष से शिखर तक’ का विधिवत विमोचन किया गया। कांग्रेस पार्टी के युवा नेता अवनीत सिंह लाम्बा ने बतौर मुख्य अतिथि स्मारिका का विमोचन किया। कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार मनमोहन सिंह और पंवार ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशन के निदेशक डॉ. बीएस पंवार विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में पांवटा साहिब सहित अन्य जिलों से आए अनेक गणमान्य लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रो. संतोष कुमार के शिष्यों और उनके साथ विभिन्न सामाजिक गतिविधियों में जुड़े लोगों ने कॉलेज के दिनों की यादें साझा कीं। वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व, शिक्षण शैली, सामाजिक सरोकारों और समाज के प्रति समर्पण को याद करते हुए कहा कि उनके विचार और कार्य आज भी लोगों को प्रेरित करते हैं।
स्मारिका के विमोचन के बाद अपने संबोधन में मुख्य अतिथि अवनीत सिंह लाम्बा ने कहा कि समाज को वरिष्ठ लोगों के अनुभवों और उनके संघर्षों से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। इसलिए उनके विचारों और आदर्शों को समझकर उनका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्व. प्रोफेसर संतोष कुमार द्वारा पर्यावरण संरक्षण के लिए किए गए संघर्षों और प्रयासों से वह भली-भांति परिचित हैं। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक और समाजसेवी के रूप में प्रो. संतोष कुमार ने समाज पर अमिट छाप छोड़ी है। उनके योगदान को हमेशा याद रखा जाना चाहिए। लाम्बा ने स्मारिका के संपादक राजेश कुमार को इस महत्वपूर्ण प्रयास के लिए शुभकामनाएं दीं। साथ ही, सरस संस्था के रेडियो प्रोजेक्ट और संस्था की अन्य गतिविधियों के संचालन में हरसंभव सहयोग देने की बात भी कही।

प्रो. संतोष कुमार के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ा रहे राजेश कुमार

गौरतलब है कि स्मारिका के संपादक राजेश कुमार का स्व. प्रोफेसर संतोष कुमार के साथ लंबे समय तक निकट जुड़ाव रहा। उन्होंने प्रो. संतोष कुमार द्वारा स्थापित संस्थानों और शुरू की गई सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। राजेश कुमार ने उनके जीवन के अंतिम समय तक साथ निभाया और आज भी उनके विचारों, सामाजिक सरोकारों तथा अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं। ‘संघर्ष से शिखर तक’ स्मारिका के माध्यम से प्रो. संतोष कुमार के जीवन, संघर्ष, सामाजिक योगदान और उनसे जुड़ी स्मृतियों को संकलित कर नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है। यह आयोजन उनके प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ उनके विचारों और समाजसेवा की विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर भी बना।
इस अवसर पर संस्था द्वारा नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करते हुए अध्यक्ष पद का कार्यभार यशपाल कपूर को सौंपा गया। इससे पहले संस्था के अध्यक्ष कुलदीप सिंह गतवाल रहे जिनके मार्गदर्शन में संस्था ने जागरूकता कार्यक्रम जारी रखे तथा कई अन्य सामाजिक कार्यों में सक्रीय भूमिका निभाई।
आज सिरमौर न्यूज़ के संस्थापक स्व. प्रो. संतोष कुमार जी की 94वीं जयंती है
नाहन शहर को बेसहारा पशुओं से जल्द मिलेगी निजात,  गौ अभ्यारण भेजे जा रहे बेसहारा पशु
*पांवटा साहिब में 'पांवटा भांगड़ा फेस्ट' , डांस और मस्ती का सजेगा महामंच*

पांवटा साहिब। 

शहर में कल शाम डांस, मस्ती और संगीत का एक शानदार संगम होने जा रहा है। ट्रेक एंड ब्लूम (Trek & Bloom) संस्था द्वारा 4 अक्टूबर (रविवार) को 'पांवटा भांगड़ा फेस्ट' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम शहर के मशहूर पैराडाइज रिसॉर्ट (Paradise Resort) में शाम 6:00 बजे से शुरू होगा।

बताते चलें कि आयोजकों के मुताबिक, यह फेस्ट सभी आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं के लिए खुला है। सबसे खास बात यह है कि भांगड़ा का यह सेशन पूरी तरह से 'बिगिनर-फ्रेंडली' है। यानी जिन लोगों को भांगड़ा करना नहीं आता, वे भी प्रोफेशनल डांसर्स के साथ कदम से कदम मिलाकर आसानी से 'फॉलो-अलोंग भांगड़ा' का आनंद ले सकते हैं।

वहीं, ट्रेक एंड ब्लूम की और से रिया सहोता ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम को और अधिक रोमांचक बनाने के लिए लाइव डीजे (Live DJ) की व्यवस्था भी की गई है, जो अपनी हाई-एनर्जी बीट्स से लोगों को थिरकने पर मजबूर करेगा। इसके अलावा, फेस्ट में शामिल होने वाले लोगों के लिए कई मजेदार गेम्स और एक्टिविटीज भी रखी गई हैं, जिनमें जीतने वाले प्रतिभागियों को आकर्षक प्राइज दिए जाएंगे।

फेस्ट में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों के लिए रिफ्रेशमेंट (खान-पान) की भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि डांस के दौरान ऊर्जा कम न हो। आयोजकों ने प्रतिभागियों से आरामदायक कपड़े और स्पोर्ट्स शूज (स्पोर्ट्स जूते) पहनकर आने की अपील की है।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टिकट की दरें काफी किफायती रखी गई हैं:
• सिंगल एंट्री (एक व्यक्ति): ₹200
• 2  (दो व्यक्ति): ₹300
कार्यक्रम में सीट सुरक्षित करने या किसी भी अन्य जानकारी के लिए आयोजकों से संपर्क किया जा सकता है। रिया सहोता ने बताया कि पांवटा साहिब में वीकेंड को और यादगार बनाने के लिए ये एक बेहतरीन और मजेदार इवेंट होने वाला है।
"द पशुपति नाथ इन्शोरेन्स ग्रुप" की स्थापना के चार वर्ष पूरे, पेराडाइज  रिसोर्ट में मनाया स्थापना दिवस
No Smoking :- रेस्ट हाउस बना सुट्टा बार 

Vikramaditya Singh  @followers @topfans
सफाई कर्मियो की जद्दोजहद पर लाम्बा ने लगाया अर्ध विराम,  समस्या के समाधान की जगी उम्मीद
National Anti Corruption and Crime Bureau संस्था के पदाधिकारियों ने  SP सिरमौर से की मुलाकात
प्रशासन और नगर परिषद के खिलाफ स्थानीय लोगो में रोष, मीडिया के आगे रखी अपनी समस्या
उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिला के 6 शिक्षकों को मिला सम्मान, डीसी सिरमौर ने सम्मानित किए शिक्षक
जंग- ए- आज़ादी के एक सिपाही कामरेड प्रेम चंद प्रेमी का आज 105 वां जन्मदिन

मनमोहन सिंह 'दानिश'

बात है पांच अक्टूबर 1922 की। हमीरपुर ज़िले के पिछड़े से गांव झबड़ोल में एक अति गरीब किसान नौधा राम के घर  एक लड़के का जन्म हुआ। पांच लड़कियों के बाद बेटा पैदा हुआ था। ज़ाहिर है घर में खुशी की एक लहर थी। इसी लिए उस लड़के का नाम प्रेम चंद रखा गया।
घर के हालात ऐसे नहीं थे कि उस बच्चे को माँ बाप स्कूल भेज पाते। इसलिए प्रेम चंद की स्कूली शिक्षा अधिक नहीं हो सकी। आज की तरह उस समय भी ग़रीब लोग अपनी ग़रीबी के लिए अपनी किस्मत को कोसते और किसी चमत्कार की आस में बाबाओं के चक्कर काटते। प्रेम चंद का परिवार भी कोई अपवाद नहीं था। उनकी मां उन्हें सिखाती, " बेटा जो भी साधु या भगवे कपड़ों में दिखे उसके पांव ज़रूर छूना"। और बालक प्रेम चंद यही करता।
कालांतर में उनका परिवार सोलन आ गया और प्रेम चंद जो कि दिमागी तौर पर बहुत ज़हीन थे उन्होंने चन्द्रदत्त शास्त्री से हिंदी की तालीम लेनी शुरू की। इस बीच उन्होंने दर्जी का काम भी सीखा। लेकिन वे बाबाओं के चक्कर में पड़े रहे। इस दौरान उन्हें स्वामी दयानंद की किताब सत्यार्थप्रकाश पढ़ने को मिल गई। उससे उनकी रूढ़िवादी सोच और कई विश्वास टूट गए। उन दिनों देश में आज़ादी की लड़ाई चल रही थी। प्रेम चंद जब 18 साल के थे तो उन्होंने कुराली में नेता जी सुभाष चंद्र बोस का भाषण सुना जो उन्होंने वहां आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में दिया था। नेता जी के भाषण का युवा प्रेम चंद पर गहरा असर पड़ा और वे गांधी जी के आंदोलन में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने अपने नाम प्रेम चंद के साथ उपनाम "नफरत" जोड़ लिया। उनके दोस्त उन्हें प्रेम चंद "नफरत" के नाम से बुलाने लगे। फिर कुछ दोस्तों ने कहा कि "नफरत" सही नहीं है इसलिए उन्होंने उनके नाम के साथ "नफ़रत" को हटा कर "प्रेमी" लगा दिया। फिर वे पूरी उम्र प्रेम चंद प्रेमी के नाम से रहे। उस समय देश भर में रियासतों के राजाओं के खिलाफ प्रजामंडल गठित किए जा रहे थे। उन्होंने ने भी अपने साथियों के साथ मिल कर बघाट रियासत में प्रजामंडल की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई। सोलन यानी बघाट में प्रजामंडल 1944-45 में बना। उस समय नानक चंद सूद को प्रधान, चंदन लाल को उसका सचिव चुना गया। उनके अलावा प्रेम चंद प्रेमी, सोमदेव, कामता प्रसाद गुप्ता, कुलानंद पंत और ज्ञान चंद टूटू को सदस्य बनाया गया। उस समय बघाट के राजा दुर्गा सिंह थे। उनका दवाब प्रजामंडल के सदस्यों और परिवारों पर पड़ने लगा। इसी दवाब के चलते उनके कुछ साथी निष्क्रिय भी हो गए थे। पर प्रजामंडल अपना काम करता रहा।
इस दौरान एक घटना घटी की घूंढ रियासत के राणा को उनकी रियासत से बाहर निकाल दिया गया तो वो बड़ोग में किराए का मकान ले कर रहने लगे। प्रेम चंद प्रेमी उससे मिले तो उसने कहा कि मेरे पास काफी हथियार हैं जिनसे शिमला में अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध किया जा सकता है। इसके बाद प्रेमी ने सोलन में ख्याली राम से बात की। वो भी तैयार हो गये। इस बारे में प्रेमी और उनके दूसरे साथियों  ने अरुणा आसफ अली को खत भी लिखा। प्रोग्राम यह बना कि शिमला जाने वाली रेल लाइन की सभी सुरागों को उड़ा दिया जाए ताकि कोई अंग्रेज़ शिमला न जा सके। लेकिन गांधी जी के अहिंसा के संदेश से प्रेरित हो कर उन्होंने यह इरादा छोड़ दिया।
इसी दौरान उन्होंने कॉर्ल मार्क्स की किताब दास कैपिटल को पढ़ लिया और आज़ादी के बाद वे कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ गए और ता उम्र मजदूरों, किसानों और शोषित वर्ग के हितों के लिए लड़ते रहे। हिमाचल प्रदेश में कम्युनिस्ट पार्टी बनाने में उनका बहुत बड़ा योग दान है। इस दौरान उन्होंने सोलन को छोड़ धर्मपुर को आपना घर और कर्म भूमि बना लिया। उन्होंने कभी उसूलों से समझौता नहीं किया। आखिर 12 फरवरी 2008 को 85 वर्ष की आयु में वे दुनिया छोड़ गए और साथ ही छोड़ गए एक बहुत बड़ा इतिहास।
आज उनके 105 वें जन्मदिन पर उन्हें शत् शत् नमन।
💐 भावपूर्ण श्रद्धांजलि 💐

🎬 दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर नहीं रहे

भारतीय सिनेमा के दमदार अभिनेता नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। 8 अक्टूबर 2026 को गोवा स्थित उनके आवास पर उनकी तबीयत बिगड़ी। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कार्डियक अरेस्ट के बाद उनका निधन हुआ।
‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में अपने यादगार अभिनय से उन्होंने करोड़ों दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई।
उनका जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति प्रदान करें और उनके परिवार एवं प्रशंसकों को यह दुख सहने की शक्ति दें।
ॐ शांति 🙏🕯️
<nis:link nis:type=tag nis:id=nanapatekar nis:value=NanaPatekar nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nanapatekardeath nis:value=NanaPatekarDeath nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=nanapatekarji nis:value=NanaPatekarJi nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=श्रद्धांजलि nis:value=श्रद्धांजलि nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=bollywood nis:value=Bollywood nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=sirmournews nis:value=SirmourNews nis:enabled=true nis:link/> <nis:link nis:type=tag nis:id=breakingnews nis:value=BreakingNews nis:enabled=true nis:link/>
व्यंग्य
पुलिस वाले ने लड़की छेड़ी, क्या बड़ी बात है?

मनमोहन सिंह 'दानिश'

अब बताओ पूरी दुनिया, या यूं कहूँ की सभ्य समाज पुलिस के पीछे पड़ गया। इल्ज़ाम है कि दिल्ली पुलिस के एक बड़े अफसर ने लड़की छेड़ दी। तो इस पर इतना बवाल क्यों? असल में लोग भूल जाते हैं, हमारे ये बहादुर पुलिस वाले तो थानों में बलात्कार तक कर देते हैं। यहां तो उस बेचारे से लड़की "छिड़" गई। उसने कोई जानबूझ कर तो छेड़ा नहीं। और फिर जो काम पुलिस के अफसर ने किया उतना तो इनके कांस्टेबल तक कर देते हैं। हां, अफसर का यह कृत्य सिपाहियों के दायरे में "ट्रेसपासिंग" ज़रूर है। जाहिर है पुलिस के सिपाहियों को अफसर की यह हरकत नागवार गुज़री होगी। लड़की छेड़ने का कार्यक्षेत्र तो सिपाहियों या हवलदार या होमगार्ड के जवानों का है, अगर यहां भी अफसर घुस गए तो ये बेचारे सिपाही कहां जाएंगे? उनका दुख कोई समझता ही नहीं।
मेरे ख्याल में सिपाहियों को यह मुद्दा अपनी मीटिंग में उठाना चाहिए। और एक सीमा रेखा खींचनी चाहिए कि कौन से काम अफसर करेंगे और कौन से सिपाही? ताकि आपस में तालमेल बना रहे। इस मामले में गुंडे बदमश, जेबकतरे, चोर और लुटेरे बहुत सही हैं। उन्होंने अपने अपने इलाके बांट रखे हैं। किसी भी व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए आपसी तालमेल ज़रूरी है। अब जंतर मंतर पर पुलिस अफसर ने जो हरकत की वह उसके स्टेटस के अनुरूप नहीं थी। उसे तो बलात्कार जैसा कोई बड़ा काम करना चाहिए था। ये महिलाओं को छेड़ना उधर हाथ लगाना उन्हें शोभा नहीं देता। दिल्ली के पुलिस अफसरों के "गिरोह" को भी इसका संज्ञान लेना चाहिए और उस अफसर की आलोचना करना चाहिए। आखिर दिल्ली पुलिस की कुछ अपनी साख है।
खैर, फिलहाल तो पूरी पुलिस, दिल्ली और केंद्र की सरकारों और नौकरशाहों को उस बेचारे मासूम अफसर को बचाने में जुट जाना चाहिए जिस पर यह मुसीबत आ गई है। लोग भड़के हुए हैं। प्रशासन की समस्या यह है कि इस मामले में  इनका आई टी सेल भी कुछ नहीं कर पा रहा। घटना का वीडियो सामने है। वे लोग कैसे साबित करेंगे कि वो लड़की खुद को "छिड़वाने" के लिए ही आई थी। समस्या गंभीर है पर जब पूरा तंत्र किसी को बचाना चाहे तो कोई क्या कर सकता है? लेकिन जनता की अदालत अलग तरह से चलती है।
जब हुई फ़जीहत ....तब सोशल मीडिया पर देनी पड़ रही सफाई!

Vikramaditya Singh @topfans
पाँवटा साहिब में किंग कोबरा का रेस्कीयू
जंग- ए- आज़ादी के एक सिपाही कामरेड प्रेम चंद प्रेमी का आज 105 वां जन्मदिन

मनमोहन सिंह 'दानिश'

बात है पांच अक्टूबर 1922 की। हमीरपुर ज़िले के पिछड़े से गांव झबड़ोल में एक अति गरीब किसान नौधा राम के घर  एक लड़के का जन्म हुआ। पांच लड़कियों के बाद बेटा पैदा हुआ था। ज़ाहिर है घर में खुशी की एक लहर थी। इसी लिए उस लड़के का नाम प्रेम चंद रखा गया।
घर के हालात ऐसे नहीं थे कि उस बच्चे को माँ बाप स्कूल भेज पाते। इसलिए प्रेम चंद की स्कूली शिक्षा अधिक नहीं हो सकी। आज की तरह उस समय भी ग़रीब लोग अपनी ग़रीबी के लिए अपनी किस्मत को कोसते और किसी चमत्कार की आस में बाबाओं के चक्कर काटते। प्रेम चंद का परिवार भी कोई अपवाद नहीं था। उनकी मां उन्हें सिखाती, " बेटा जो भी साधु या भगवे कपड़ों में दिखे उसके पांव ज़रूर छूना"। और बालक प्रेम चंद यही करता।
कालांतर में उनका परिवार सोलन आ गया और प्रेम चंद जो कि दिमागी तौर पर बहुत ज़हीन थे उन्होंने चन्द्रदत्त शास्त्री से हिंदी की तालीम लेनी शुरू की। इस बीच उन्होंने दर्जी का काम भी सीखा। लेकिन वे बाबाओं के चक्कर में पड़े रहे। इस दौरान उन्हें स्वामी दयानंद की किताब सत्यार्थप्रकाश पढ़ने को मिल गई। उससे उनकी रूढ़िवादी सोच और कई विश्वास टूट गए। उन दिनों देश में आज़ादी की लड़ाई चल रही थी। प्रेम चंद जब 18 साल के थे तो उन्होंने कुराली में नेता जी सुभाष चंद्र बोस का भाषण सुना जो उन्होंने वहां आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में दिया था। नेता जी के भाषण का युवा प्रेम चंद पर गहरा असर पड़ा और वे गांधी जी के आंदोलन में शामिल हो गए। इस दौरान उन्होंने अपने नाम प्रेम चंद के साथ उपनाम "नफरत" जोड़ लिया। उनके दोस्त उन्हें प्रेम चंद "नफरत" के नाम से बुलाने लगे। फिर कुछ दोस्तों ने कहा कि "नफरत" सही नहीं है इसलिए उन्होंने उनके नाम के साथ "नफ़रत" को हटा कर "प्रेमी" लगा दिया। फिर वे पूरी उम्र प्रेम चंद प्रेमी के नाम से रहे। उस समय देश भर में रियासतों के राजाओं के खिलाफ प्रजामंडल गठित किए जा रहे थे। उन्होंने ने भी अपने साथियों के साथ मिल कर बघाट रियासत में प्रजामंडल की स्थापना में बड़ी भूमिका निभाई। सोलन यानी बघाट में प्रजामंडल 1944-45 में बना। उस समय नानक चंद सूद को प्रधान, चंदन लाल को उसका सचिव चुना गया। उनके अलावा प्रेम चंद प्रेमी, सोमदेव, कामता प्रसाद गुप्ता, कुलानंद पंत और ज्ञान चंद टूटू को सदस्य बनाया गया। उस समय बघाट के राजा दुर्गा सिंह थे। उनका दवाब प्रजामंडल के सदस्यों और परिवारों पर पड़ने लगा। इसी दवाब के चलते उनके कुछ साथी निष्क्रिय भी हो गए थे। पर प्रजामंडल अपना काम करता रहा।
इस दौरान एक घटना घटी की घूंढ रियासत के राणा को उनकी रियासत से बाहर निकाल दिया गया तो वो बड़ोग में किराए का मकान ले कर रहने लगे। प्रेम चंद प्रेमी उससे मिले तो उसने कहा कि मेरे पास काफी हथियार हैं जिनसे शिमला में अंग्रेजों के खिलाफ गुरिल्ला युद्ध किया जा सकता है। इसके बाद प्रेमी ने सोलन में ख्याली राम से बात की। वो भी तैयार हो गये। इस बारे में प्रेमी और उनके दूसरे साथियों  ने अरुणा आसफ अली को खत भी लिखा। प्रोग्राम यह बना कि शिमला जाने वाली रेल लाइन की सभी सुरागों को उड़ा दिया जाए ताकि कोई अंग्रेज़ शिमला न जा सके। लेकिन गांधी जी के अहिंसा के संदेश से प्रेरित हो कर उन्होंने यह इरादा छोड़ दिया।
इसी दौरान उन्होंने कॉर्ल मार्क्स की किताब दास कैपिटल को पढ़ लिया और आज़ादी के बाद वे कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़ गए और ता उम्र मजदूरों, किसानों और शोषित वर्ग के हितों के लिए लड़ते रहे। हिमाचल प्रदेश में कम्युनिस्ट पार्टी बनाने में उनका बहुत बड़ा योग दान है। इस दौरान उन्होंने सोलन को छोड़ धर्मपुर को आपना घर और कर्म भूमि बना लिया। उन्होंने कभी उसूलों से समझौता नहीं किया। आखिर 12 फरवरी 2008 को 85 वर्ष की आयु में वे दुनिया छोड़ गए और साथ ही छोड़ गए एक बहुत बड़ा इतिहास।
आज उनके 105 वें जन्मदिन पर उन्हें शत् शत् नमन।
नाहन शहर को बेसहारा पशुओं से जल्द मिलेगी निजात,  गौ अभ्यारण भेजे जा रहे बेसहारा पशु
National Anti Corruption and Crime Bureau संस्था के पदाधिकारियों ने  SP सिरमौर से की मुलाकात
सफाई कर्मियो की जद्दोजहद पर लाम्बा ने लगाया अर्ध विराम,  समस्या के समाधान की जगी उम्मीद
उत्कृष्ट कार्य करने वाले जिला के 6 शिक्षकों को मिला सम्मान, डीसी सिरमौर ने सम्मानित किए शिक्षक
*पांवटा साहिब में 'पांवटा भांगड़ा फेस्ट' , डांस और मस्ती का सजेगा महामंच*

पांवटा साहिब। 

शहर में कल शाम डांस, मस्ती और संगीत का एक शानदार संगम होने जा रहा है। ट्रेक एंड ब्लूम (Trek & Bloom) संस्था द्वारा 4 अक्टूबर (रविवार) को 'पांवटा भांगड़ा फेस्ट' का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम शहर के मशहूर पैराडाइज रिसॉर्ट (Paradise Resort) में शाम 6:00 बजे से शुरू होगा।

बताते चलें कि आयोजकों के मुताबिक, यह फेस्ट सभी आयु वर्ग के पुरुषों और महिलाओं के लिए खुला है। सबसे खास बात यह है कि भांगड़ा का यह सेशन पूरी तरह से 'बिगिनर-फ्रेंडली' है। यानी जिन लोगों को भांगड़ा करना नहीं आता, वे भी प्रोफेशनल डांसर्स के साथ कदम से कदम मिलाकर आसानी से 'फॉलो-अलोंग भांगड़ा' का आनंद ले सकते हैं।

वहीं, ट्रेक एंड ब्लूम की और से रिया सहोता ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम को और अधिक रोमांचक बनाने के लिए लाइव डीजे (Live DJ) की व्यवस्था भी की गई है, जो अपनी हाई-एनर्जी बीट्स से लोगों को थिरकने पर मजबूर करेगा। इसके अलावा, फेस्ट में शामिल होने वाले लोगों के लिए कई मजेदार गेम्स और एक्टिविटीज भी रखी गई हैं, जिनमें जीतने वाले प्रतिभागियों को आकर्षक प्राइज दिए जाएंगे।

फेस्ट में हिस्सा लेने वाले सभी लोगों के लिए रिफ्रेशमेंट (खान-पान) की भी विशेष व्यवस्था की गई है ताकि डांस के दौरान ऊर्जा कम न हो। आयोजकों ने प्रतिभागियों से आरामदायक कपड़े और स्पोर्ट्स शूज (स्पोर्ट्स जूते) पहनकर आने की अपील की है।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए टिकट की दरें काफी किफायती रखी गई हैं:
• सिंगल एंट्री (एक व्यक्ति): ₹200
• 2  (दो व्यक्ति): ₹300
कार्यक्रम में सीट सुरक्षित करने या किसी भी अन्य जानकारी के लिए आयोजकों से संपर्क किया जा सकता है। रिया सहोता ने बताया कि पांवटा साहिब में वीकेंड को और यादगार बनाने के लिए ये एक बेहतरीन और मजेदार इवेंट होने वाला है।
No Smoking :- रेस्ट हाउस बना सुट्टा बार 

Vikramaditya Singh
प्रशासन और नगर परिषद के खिलाफ स्थानीय लोगो में रोष, मीडिया के आगे रखी अपनी समस्या
"द पशुपति नाथ इन्शोरेन्स ग्रुप" की स्थापना के चार वर्ष पूरे, पेराडाइज  रिसोर्ट में मनाया स्थापना दिवस