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RAJESH KUMAR

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गिरीपार के भरली गांव में वीर सपूत आशीष के शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

सिरमौर के गिरीपार क्षेत्र आंजभोज के भरली गांव के वीर सपूत आशीष कुमार के शहीदी दिवस पर पैतृक गांव के सामुदायिक भवन में श्रद्धांजली सभा का आयोजन किया गया। जिसमें भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब एवं शिलाई क्षेत्र तथा पूर्व सैनिक संगठन  आंजभोज व 19 ग्रेनेडियर बटालियन के जवानों और परिवार व गांव के समस्त जनों एवं विधालय के विधार्थियों ने अमर शहीद आशीष को श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कड़ी में सर्वप्रथम राष्ट्रगान एवं मौन तदोपरांत उपस्थित सभी लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। सर्वप्रथम शाहीद की माता संतरो देवी और पिता मंगी राम, बहन पूजा, भाई राहुल ने पुष्प अर्पित कर शहीद आशीष को नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की। उसके उपरांत क्षेत्र के अन्य शहीद रविंद्र के पिता सुंदर सिंह, शहीद समीर के माता कमला देवी व शहीद राजेंद्र के भाई रंगीलाल के अलावा संगठन के अध्यक्ष करनैल सिंह एवं लेफ्टिनेंट कर्नल अनूप तोमर तथा समस्त लोगों ने पुष्पांजलि अर्पित की। 19 ग्रेनेडियर बटालियन से विशेष रूप से आये जवानों तथा संगठन के अध्यक्ष करनैल सिंह व श्याम लाल एवं साथियों ने शहीद के माता पिता का अंगवस्त्र से सम्मान किया। 
बताते चलें कि आशीष कुमार 19 ग्रेनेडियर बटालियन के अधीन अरूणाचल प्रदेश में सेवारत थे। 27 अगस्त 2024 को "ऑपरेशन अलर्ट" के दौरान अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए और वीरता का परिचय देते हुए देश को अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।
संनद रहे कि गत वर्ष माता संतरो देवी अपने बेटे के सिर पर सेहरा बांधने का सपने देख रही थी। उन्हें क्या पता था की होनी को कुछ और ही मंजूर था। बेटे की शहादत की खबर के साथ उनका यह सपना टूट गया। शहादत की खबर सुनते ही माता और परिवार पर दुखों का पहाड़ टुट पड़ा। किंतु माता - पिता, भाई - बहन, परिवार, समस्त ग्राम व क्षेत्रवासियों को अपने लाल की शहादत पर गर्व है। इस मौके पर शहीद के माता पिता व बहन तथा नवयुवक मंडल भरली ने राजकीय प्राथमिक विद्यालय भरली के छात्रों को स्कूल ट्रैकसूट एंव पठन सामग्री वितरित की। भूतपूर्व सैनिक सगंठन पांवटा साहिब व शिलाई क्षेत्र के पदाधिकारियों ने उपस्थित सभी नौजवानों से नशे से दूर रहने व राष्ट्र के प्रति समर्पित होकर काम करने की अपील की तथा देश के लिए हमेशा मर-मिटने की बात की।
इस मौके पर आशीष की माता श्रीमती संतरो देवी और पिता मंगी राम, बहन पूजा, भाई राहुल के अलावा भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब एवं शिलाई क्षेत्र के भूतपूर्व सैनिक संगठन पांवटा साहिब एवं शिलाई क्षेत्र से अध्यक्ष करनैल सिंह, उपाध्यक्ष हरिन्द्र सिंह, कोषाध्यक्ष इंद्र सिंह, नरेंद्र ठुंडू, हाकम सिंह, मामराज चौहान, मोहर सिंह, रामभज शर्मा, स्वर्णजीत, सुनील, सुरेंद्र, रोशनलाल, पृथ्वी,नेतर सिंह, सुरेश देवा, केदार सिंह के अलावा आंजभोज संगठन से अध्यक्ष श्याम लाल तोमर के अलावा दर्जनों भूतपूर्व सैनिकों एवं अन्य तथा स्थानीय पंचायत प्रधान रणदीप एंव समस्त ग्रामवासियों के अलावा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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कल नाहन में होगा भाजयुमो का धरना, प्रदेश सरकार के खिलाफ युवाओं में गहरा रोष 

कल दिनांक 20/08/2026 (वीरवार) को भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला मुख्यालय नाहन में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ० राजीव बिंदल की अगुवाई में प्रदेश की युवा विरोधी कांग्रेस सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन करेगी।
भाजयुमों प्रदेश कांग्रेस सरकार को रोजगार,महँगाई,शिक्षण संस्थानों को बंद करने,10 झूठी गारंटियो,क़ानून व्यवस्था,प्रदेश में बढ़ता नशे का कारोबार व अन्य मुद्दों पर घेरकर जोरदार प्रदर्शन करेगी।इस धरना प्रदर्शन में पाँवटा साहिब विधानसभा से 100 से अधिक युवा भाग लेंगे।
चरणजीत सिंह चौधरी ने पाँवटा साहिब विधानसभा के दोनों मंडलों के युवाओं से निवेदन किया हैं कि इस धरना प्रदर्शन में बढ़-चढ़ कर भाग ले और इस सरकार को प्रदेश से उखाड़ फेंकने का संकल्प लें।
चौधरी ने कहा कि वर्तमान की प्रदेश सरकार ने युवाओं को अपने कार्यकाल में ठगने का ही काम किया है,अपने चुनावी घोषणा पत्र में और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा चुनाव से पहले युवाओ को सरकार के विभागों में 5 लाख रोजगार देने के वादे किए गए थे।उन्होंने सार्वजनिक मंचों से वादा किया था कि पहली कैबिनेट में ही 1 लाख युवाओं को रोजगार दिया जाएगा।लेकिन इस सरकार को बने 4 साल होने वाले है,युवा आज भी सिर्फ इंतज़ार ही कर रहे है और अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
अनेकों स्कूल-कॉलेज बंद कर दिये गए,क़ानून व्यवस्था का बुरा हाल है।नशे का कारोबार हिमाचल प्रदेश में बढ़ता जा रहा है।नशे से देवभूमि हिमाचल पूरे देश में बदनाम हो रही है।
उन्होंने कहा कि भाजयुमो की सोयी हुई सरकार को जगाने के लिए सड़को पर उतर कर आंदोलन करेगी।
पाँवटा साहिब मंडल के युवा मोर्चा अध्यक्ष संयम गुप्ता और गिरिपार आँजभोज के युवा मोर्चा अध्यक्ष भगवान दास चौधरी ने भी युवाओ से इस धरना प्रदर्शन में बढ़-चढ़ कर भाग लेने का आह्वान किया है।
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एडिटर स्टिंगबाज़- संजीव शर्मा
प्रो. संतोष कुमार जी की पुण्य तिथि पर "मुफ्त स्वास्थ्य जांच शिविर" का सफल आयोजन
श्रद्धांजलि

यादों में ज़िंदा एक प्रोफेसर 

मनमोहन सिंह 'दानिश'

" सर नहीं रहे", पांवटा साहिब से राजेश के ये शब्द फोन पर सुन कर मैं जैसे जड़ हो गया था। बात है 17 अगस्त 2013 की।इसके साथ ही मेरे मानस पटल पर उनके सानिध्य में गुज़रे सभी पल एक फिल्म की तार आने लगे।
एक शिक्षक, एक दोस्त, एक मार्गदर्शक, संतोष कुमार सर ऐसे ही थे। क्लास में एक कठोर शिक्षक, क्लास से बाहर खुल के हंसने वाले दोस्त और जब भी किसी छात्र को ज़रूरत हुई तो उसके मार्ग दर्शक। कमाल का व्यक्तित्व था उनका। ग़लत को ग़लत कहने का हौसला था उनमें। अनुशासन और वक्त के बहुत पाबंद थे। उनसे यही सीखा। आज उनको हम सब से बिछुड़े हुए 13 साल हो गए लेकिन आज भी वे हमारे दिलों में ज़िंदा हैं। उनकी आवाज़ कानों में गूंजती है।
संतोष सर जिन्हें हम सभी लोग प्यार से "भाई जी" भी बुलाते थे, बहुआयामी शख्शियत के मालिक थे। जब वे क्लास में अंग्रेज़ी पढ़ाते तो लगता जैसे खुद शेक्सपियर सामने खड़ा है, जब हमे बैडमिंटन की कोचिंग देते तो लगता था कोई इंडोनेशियाई या चीनी कोच हमसे रूबरू है। बैडमिंटन की जो टेक्नीक्स उन्होंने प्रोफेसर एस के गुप्ता के साथ मिल कर हमें सीखने की कोशिश की, जाहिर है हमने सीखी नहीं, वे सभी कुछ सालों बाद मैने चीनी खिलाड़ियों को अपनाते देखा। गुप्ता जी फिजिक्स के प्रोफेसर थे और शतरंज के बहुत बड़े खिलाड़ी। बहुत कम लोग जानते हैं कि संतोष सर ने अपनी शुरुआत हिंदी के प्रोफेसर के तौर पर की थी, मुझे खुद उनके देहांत के बाद यह बात पता चली। असल में उन्होंने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में एम ए किया था।
एक ड्रामा निर्देशक के तौर पर उनका एक अलग ही किरदार सामने आता है। मैने उन्हें मोहन राकेश का कालजेई नाटक "आषाढ़ का एक दिन" निर्देशित करते देख है। वे संवादों के उच्चारण का खास ध्यान रखते थे। कोई भी गलत उच्चारण उनको बिल्कुल सहन नहीं होता था। उनका गुस्सा अति भयानक होता। उस हंसमुख चेहरे के पीछे इतने गुस्से वाला व्यक्ति भी हो सकता है इसकी कल्पना भी नहीं होती थी। कई बार वे हाथ भी उठा देते थे। नाटक की रिहर्सल में अगर उनको गुस्सा आता तो हाथ में जो कुछ भी होता वही कलाकार पर फेंक के मारते। उनके व्यक्तित्व को समझना हर एक के बस की बात नहीं थी। उसे वही समझ पाया जो उनके बहुत निकट हुआ।
आत्मसम्मान और उसूल उनके लिए सर्वोपरि थे। इन दोनों चीजों के लिए उन्होंने कभी समझौता नहीं किया। वैसे तो उन पर पूरी किताब लिखी जा सकती है, पर यहां मैं एक छोटी सी घटना का ज़िक्र ज़रूर करूंगा। सन तो याद नहीं लेकिन इतना याद है कि हम लोग कॉलेज छोड़ चुके थे। और संतोष सर भी शायद नहान कॉलेज में थे। एक दिन उनका संदेश आया कि मैं सोलन के रेस्ट हाऊस में आ रहा हूं मुझसे आ कर मिलो। मैं और मेरा दोस्त अश्वनी लाल हम दोनों तय समय पर उनसे मिलने रेस्ट हाऊस चले गए। वहां उनका बर्ताव कुछ बदला हुआ था। उनकी बातचीत में काफी रूखापन था। यहां तक कि उन्हों ने हमें बैठने को भी नहीं कहा। बस इतना बोले, " मैं यहां कॉलेज में होने वाली परीक्षाओं के लिए सुपरिंटेंडेंट बन कर आया हूं और जब तक परीक्षाएं चलेंगी आप सब लोग मुझसे मिलने की कोशिश भी मत करना।" और उस दौरान वे किसी से नहीं मिले। परीक्षा खत्म होने के बाद वे एक दिन और रुके हमें बुलाया, हमारे कुछ और सहपाठी भी साथ थे, हम सभी को लंच करवाया, खूब हंसी ठिठोली हुई। इस तरह स्वभाव था उनका।
उनके जीवन के आखिरी दिनों में मैं उनसे मिलने अक्सर पांवटा साहिब चला जाता। खूब बातें होती। वे मुझे हंसते हंसते विदा करते। लेकिन जब मैं उनसे आखिरी बार मिला और वापिस आने के लिए कार में बैठ रहा था तो पहली बार उनके चेहरे पर उदासी थी। मेरी खिड़की के पास आ कर बोले, "यार मिलते रहा करो अच्छा लगता है" । मै हल्का सा मुस्कुराया और कहा, सर बिल्कुल मिलता रहूंगा। इतना कह कर मैं चला आया। ऐसी बात उन्होंने पहले कभी नहीं की थी। मुझे क्या पता था कि अब उनसे कभी नहीं मिलूंगा। फिर एक दिन उनके एक छात्र राजेश का फोन आया। उसने बस इतना कहा, " सर नहीं रहे"। मैं कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था। कुछ देर मै स्तब्ध खड़ा रहा और फिर मैने बिना कुछ कहे फोन काट दिया।  कुछ समय बाद राजेश को फोन करके मैंने बाकी जानकारी हासिल की, बाकी दोस्तों को सूचना दी। मुझे इस बात की तसल्ली है कि मैं उनके अंतिम संस्कार में शामिल हो पाया। उनके आखिरी दर्शन किए। संतोष सर चले गए पर हमें बहुत कुछ देने के बाद। वे सदा हमारे दिल में ज़िंदा रहेंगे।
राजपुर में आयोजित निशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर को लेकर पत्रकार वार्ता
माजरा में प्रदेश सरकार के खिलाफ भाजपा का प्रदर्शन, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की अगुआई में हुआ प्रदर्शन
सिरमौर :- राजकीय प्राथमिक पाठशाला डांडीवाला में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छात्राओं द्वारा प्रस्तुति
सिरमौर:- GPS डांडीवाला में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान स्थानीय लोगो झूम उठे
सिरमौर :- स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर GPS -डांडीवाला में छात्राओं द्वारा पहाड़ी गाने पर शानदार प्रस्तुति
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डॉ. जोगेंद्र हाब्बी को मिला संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार,
विज्ञान भवन दिल्ली में राष्ट्रपति के करकमलों द्वारा मिला पुरस्कार
भाजपा अध्यक्ष की अगुवाई में नाहन में तिरंगा यात्रा
बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता तिरंगा रैली में पहुंचे