कैंची धाम वाले नीम करौली बाबा: एक रहस्यमयी दिव्य यात्रा
महज 2 करोड़ के छोटे बजट में बनी फिल्म आज कमाई के नए रिकॉर्ड तोड़ रही है! 20वीं शताब्दी के महान संत, जिन्हें भक्त भगवान वीर हनुमान जी का अवतार मानते हैं, उनके जीवन के रहस्य अब हर दिल को छू रहे हैं।
आखिर ‘नीम करौली’ और ‘नीब करोरी’ नाम के पीछे क्या कहानी है?
तपस्या का स्थान: गृहस्थ जीवन त्यागने के बाद संत लक्ष्मी नारायण शर्मा ने फर्रुखाबाद के ‘नीब करोरी’ गांव की एक गुफा में कठिन तपस्या की। यहीं से भक्तों ने उन्हें ‘नीब करोरी बाबा’ कहना शुरू किया।
ट्रेन और नीम का पेड़: एक बार बिना टिकट सफर करने पर टीटीई ने बाबा को नीब करोरी स्टेशन पर उतार दिया। बाबा वहां एक नीम के पेड़ के नीचे जाकर बैठ गए। इसके बाद ट्रेन का इंजन चलने के बावजूद गाड़ी 1 इंच भी आगे नहीं बढ़ी! जब टीटीई और अधिकारियों ने बाबा से क्षमा मांगी और उन्हें वापस ट्रेन में बिठाया, तभी गाड़ी आगे बढ़ सकी।
समय के साथ ‘नीब करोरी’ का यह नाम ‘नीम करौ�
Sirsa, Sirsa | Sep 5, 2026