
झुंझुनूं बना ATREE के साथ जुड़ने वाला राजस्थान का पहला जिला
चारागाह विकास के लिए जिला प्रशासन ने किया ऐतिहासिक एमओयू, वैज्ञानिक तरीके से होंगे चारागाह विकसित
झुंझुनूं, 27 जुलाई। जिले के चारागाहों के वैज्ञानिक विकास एवं पशुपालकों को गुणवत्तापूर्ण चारा उपलब्ध कराने की दिशा में झुंझुनूं जिला प्रशासन ने एक ऐतिहासिक पहल करते हुए देश की प्रतिष्ठित पर्यावरण एवं शोध संस्था ATREE (Ashoka Trust for Research in Ecology and the Environment) के साथ समझौता (एमओयू) किया है। इस पहल के साथ झुंझुनूं, ATREE के साथ जुड़ने वाला राजस्थान का पहला जिला बन गया है। इस परियोजना के माध्यम से जिले के चारागाहों का वैज्ञानिक विकास कर पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान की जाएगी।
जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने बताया कि करीब छह माह पूर्व जिला प्रशासन द्वारा ATREE से संपर्क कर झुंझुनूं के चारागाहों के वैज्ञानिक विकास का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद संस्था के विशेषज्ञों ने जिले का कई बार दौरा कर विभिन्न स्थलों का अध्ययन किया। अध्ययन के उपरांत तीन महत्वपूर्ण एमओयू किए गए हैं, जिनके माध्यम से जिले में ग्रासलैंड डेवलपमेंट परियोजना का क्रियान्वयन प्रारंभ होगा।
उन्होंने बताया कि परियोजना के प्रथम चरण में बुहाना, गुढ़ागौड़जी एवं पीथूसर क्षेत्र के चारागाहों एवं जोहड़ों का चयन किया गया है। सबसे पहले बुहाना क्षेत्र में कार्य प्रारंभ होगा तथा इसके बाद चरणबद्ध तरीके से अन्य क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक पद्धति से चारागाह विकसित किए जाएंगे। भविष्य में इस मॉडल का विस्तार जिले के अन्य चारागाहों तक किया जाएगा।
डॉ. गर्ग ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना में सरकार की ओर से संस्था को किसी प्रकार की वित्तीय सहायता या भूमि आवंटित नहीं की जाएगी। ATREE केवल अपनी तकनीकी विशेषज्ञता, वैज्ञानिक परामर्श, बीज एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराएगी। वहीं, विभिन्न सरकारी योजनाओं, विशेष रूप से वीबीजी रामजी एवं अन्य योजनाओं के तहत उपलब्ध संसाधनों और श्रमिकों का नियमानुसार उपयोग किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि परियोजना का उद्देश्य केवल चारागाह विकसित करना नहीं, बल्कि पशुपालन को अधिक लाभकारी बनाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करना भी है। इसके तहत स्थानीय घास की प्रजातियों का संरक्षण एवं संवर्धन, पशुओं के लिए वर्षभर गुणवत्तापूर्ण चारे की उपलब्धता, दुग्ध उत्पादन एवं गुणवत्ता में सुधार, चारागाहों की उत्पादकता में वृद्धि, ग्रामीणों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, विभिन्न योजनाओं का बेहतर समन्वय, चारागाह भूमि पर अतिक्रमण की रोकथाम तथा पर्यावरण संरक्षण एवं जैव विविधता को बढ़ावा दिया जाएगा।
ATREE के निदेशक डॉ. अबी वनक ने बताया कि उनकी संस्था पिछले लगभग 30 वर्षों से पर्यावरण, पारिस्थितिकी एवं ग्रासलैंड संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत किसी बाहरी या हाइब्रिड घास का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि सेवन, धामण जैसी स्थानीय घास की प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा, जो कम पानी में बेहतर उत्पादन देती हैं तथा पशुओं के स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन के लिए अधिक उपयोगी हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि झुंझुनूं में विकसित होने वाला यह मॉडल भविष्य में पूरे राजस्थान के लिए अनुकरणीय बनेगा तथा विभिन्न विभागों के समन्वय से चारागाह संरक्षण एवं विकास का प्रभावी मॉडल स्थापित होगा।
जिला प्रशासन का मानना है कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जिले के हजारों पशुपालकों की आजीविका को सुदृढ़ करने, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए चारागाहों के संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।
एमओयू को यादगार बनाने के लिए जिला जनसंपर्क कार्यालय परिसर में पौधारोपण भी किया गया। इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुरुषोत्तम धानका, उप वन संरक्षक काविया पी.वी., वाटरशैड एसई सुमेर सिंह, एक्सईएन मनोज गौड़, जिला जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु सिंह, सहायक जनसंपर्क अधिकारी विकास चाहर सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं ATREE की प्रतिनिधि संजना उपस्थित रहे। #Jhunjhunu #JhunjhunuNews District Collector & Magistrate - Jhunjhunu