
हमारे बेहद प्रिय मित्र और प्रभात खबर के छायाकार भाई सतेंद्र कुमार की धर्मपत्नी के निधन की खबर ने मुझे भीतर तक झकझोर कर रख दिया। यह खबर सुनकर मन स्तब्ध है। बीते 12 दिनों से वह एम्स में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं। सर्पदंश के बाद परिवार और हम सभी शुभचिंतकों को पूरी उम्मीद थी कि वह स्वस्थ होकर घर लौटेंगी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।आज एक मां अपने दो छोटे-छोटे मासूम बच्चों को हमेशा के लिए छोड़कर चली गईं। उन बच्चों को शायद अभी यह भी पूरी तरह समझ नहीं होगा कि उनकी मां अब कभी उन्हें गोद में नहीं उठाएंगी, उनके सिर पर हाथ नहीं फेरेंगी और उनकी छोटी-छोटी खुशियों में मुस्कुराएंगी नहीं। यह सोचकर ही कलेजा कांप उठता है। भाई सतेंद्र कुमार मेरे लिए सिर्फ एक साथी पत्रकार नहीं, बल्कि बेहद अच्छे और आत्मीय मित्र हैं। ऐसे दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े होने के लिए शब्द बहुत छोटे लग रहे हैं। एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया, जिसकी भरपाई शायद जीवन भर नहीं हो सकेगी। ईश्वर, ऐसा नहीं करना चाहिए था। आखिर उस परिवार का क्या दोष था? मासूम बच्चों से उनकी मां क्यों छीन ली? ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और भाई सतेंद्र कुमार सहित पूरे परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति दें। बच्चों के सिर से मां का साया उठना सबसे बड़ा दुख है।
भावपूर्ण श्रद्धांजलि। ॐ शांति।
Arwal, Arwal | Sep 1, 2026