
करोड़ों की लागत से बना जेबीटी संस्थान बदहाल, वर्षों से खाली पड़ा आधुनिक परिसर
मोरनी। हरियाणा सरकार द्वारा मोरनी के रामसर क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित जेबीटी (जूनियर बेसिक ट्रेनिंग) संस्थान का विशाल भवन वर्षों से खाली पड़ा है। रखरखाव के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस भवन के उपयोग को लेकर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो यह भी पुराने जेबीटी छात्रावास की तरह खंडहर में तब्दील हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार, जेबीटी पाठ्यक्रम बंद होने के बाद यह आधुनिक परिसर पूरी तरह अनुपयोगी हो गया। लंबे समय से खाली पड़े भवन की दीवारों, कमरों और अन्य संरचनाओं पर जर्जरता के निशान दिखाई देने लगे हैं। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से तैयार की गई सरकारी संपत्ति का इस तरह बेकार पड़े रहना चिंता का विषय है।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया कि एक ओर क्षेत्र के कई सरकारी विभाग किराये के भवनों में संचालित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर इतना बड़ा सरकारी परिसर खाली पड़ा हुआ है। मोरनी क्षेत्र में बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय, कृषि विभाग, रोजगार कार्यालय, डाकघर, बैंक सहित कई कार्यालय आज भी किराये के भवनों में चल रहे हैं।
भवन में सरकारी सेवाएं शुरू करने की मांग
भाजपा युवा नेता कमलदीप राणा ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और शिक्षा मंत्री से जेबीटी संस्थान परिसर में आईटीआई स्थापित करने की मांग की है। इस संबंध में जिला उपायुक्त पंचकूला को भी ज्ञापन सौंपा जा चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि भवन का उपयोग शिक्षा, प्रशासनिक सेवाओं या अन्य जनहित कार्यों के लिए किया जाना चाहिए, ताकि क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिल सके।
ग्रामीणों ने रखीं प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि खाली पड़े भवन में विभिन्न सरकारी कार्यालयों को स्थानांतरित किया जाए। यदि ऐसा संभव नहीं है तो यहां आईटीआई या अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थान शुरू किया जाए। साथ ही भवन का नियमित रखरखाव सुनिश्चित कर करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति को खंडहर बनने से बचाया जाए।
इस मांग का समर्थन करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता कमलदीप राणा, महिला सरपंच काजल शर्मा, समाजसेवी दीपक शर्मा, रविंद्र सिंह जब्याल, भीम दत्त शर्मा, रिंकू शर्मा, पंकज कौशिक, ललित शर्मा, भजन लाल सहित अनेक ग्रामीणों ने सरकार से शीघ्र निर्णय लेने की अपील की है। उनका कहना है कि भवन का उपयोग होने से न केवल सरकारी संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा, बल्कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगारोन्मुखी एवं तकनीकी शिक्षा के अवसर भी मिल सकेंगे।