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प्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण के लिए 10 हजार 800 करोड़ रूपये की स्वीकृति *कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना 2031 तक निरंतर रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति* *मूंग उपार्जन के लिए 1,587 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराए जाने का निर्णय* *नगरीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास के लिए 8 हजार 445 करोड़ रूपये की स्वीकृति* *टेक-होम राशन के उत्पादन एवं प्रदाय की व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित किये जाने का निर्णय* *वाणिज्यिक कर विभाग के कार्यालय संचालन के लिए 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति* *मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय* ---- सतना 14 जुलाई 2026/मुख्यमंत्री Dr Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार को मंत्रालय में सम्पन्न हुई। मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण के लिए 10 हजार 800 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। राज्य सरकार ने शहरों के कायाकल्प के लिए नगरीय अधोसंरचना विकास मद में 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है। इसके साथ ही कैबिनेट ने किसानों के हित में मूंग उपार्जन के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए कुण्डलिया परियोजना को निरंतर रखने जैसे कई दूरगामी और ऐतिहासिक निर्णयों पर मुहर लगायी है। *कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना की निरंतरता के लिए 245 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति* मंत्रि-परिषद ने राजगढ़ में जल संसाधन विभाग की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना को 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरन्तर संचालन के लिए 245 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। राजगढ़ जिले में निर्मित यह एक वृहद सिंचाई परियोजना है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य बांध निर्माण कर सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिले के 1,39,600 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित करना है। *मूंग उपार्जन के लिए 1,587 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराए जाने का निर्णय* मंत्रि-परिषद ने रबी वर्ष 2023-24 विपणन वर्ष 2024-25 में भारत सरकार की प्राईस सपोर्ट स्कीम अन्तर्गत लक्ष्य से अधिक उपार्जित मूंग के लिए 1,587 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराए जाने का निर्णय लिया है। निर्णय अनुसार पंजाब नेशनल बैंक से ली गई साख सीमा में 19 जुलाई 2026 से 18 जनवरी 2027 तक 6 माह की अवधि के लिए शेष राशि 396 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति और भारतीय स्टेट बैंक से ली गई साख सीमा में 3 जुलाई 2026 से 2 जुलाई 2027 तक 1 वर्ष की अवधि के लिए शेष राशि 1,191 करोड़ रूपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराई जायेगी। *टेक-होम राशन के उत्पादन एवं प्रदाय की व्यवस्था महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित किये जाने का निर्णय* मंत्रि-परिषद ने टेक-होम राशन के उत्पादन एवं प्रदाय की व्यवस्था मध्यप्रदेश राज्य आजीविका फोरम से वापस लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग को तत्काल हस्तांतरित किये जाने का निर्णय लिया है। तत्कालिक रूप से अन्तरिम व्यवस्था के रूप में स्व सहायता समूह से पूरक पोषण आहार प्रदाय के लिए विभाग को अधिकृत किया गया है। अन्तरिम व्यवस्था तत्काल प्रारंभ किए जाने के साथ ही भारत सरकार के नवीन दिशा निर्देश जारी होने एवं नवीन निर्देश अनुसार व्यवस्था स्थापित होने तक के लिए टेक होम राशन की व्यवस्था, अल्प कालीन निविदा के माध्यम से किए जाने के लिए विभाग को अधिकृत किया गया है। भारत सरकार के नवीन दिशा निर्देश जारी होने के बाद विभाग स्थायी व्यवस्था स्थापित करेगा। *नगरीय क्षेत्रो में अधोसंरचना विकास के लिए 8 हजार 445 करोड़ रूपये की स्वीकृति* मंत्रि-परिषद ने वाणिज्य कर विभाग के तहत पालिका अधिनियम अंतर्गत पंजीयन एवं मुद्रांक शुल्क के अधिभार से प्राप्त राशि का निधि में अंतरण से संबंधित योजना के आगामी 5 वर्षों तक संचालन के लिए 8 हजार 445 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। पालिका अधिनियम अंतर्गत मुदांक शुल्क के साथ म.प्र. नगर पलिका/नगर निगम अतिरिक्त शुल्क के रूप में उद्ग्रहीत की गई राशि को नगरीय विकास विभाग को अंतरित किया जाता है। इस राशि का उपयोग नगर निगम, नगर पलिका तथा नगर परिषद द्वारा नगरीय क्षेत्रों में अधोसंरचना विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन तथा ऐसी परियोजनाओं के लिए निकायों द्वारा लिए गये ऋण पुनर्भुगतान के लिए किया जाता है। *वाणिज्यिक कर विभाग के कार्यालय संचालन के लिए 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति* मंत्रि-परिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग के अंतर्गत संचालित तीन स्थापना योजनाओ को आगामी 5 वर्षों की अवधि यानि वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए कुल राशि 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार मुख्यालय संचालन के लिए 60 करोड़ 81 लाख रूपये जिला कार्यालय संचालन के लिए 434 करोड़ 81 लाख रूपये और परिक्षेत्रीय कार्यालय के संचालन के लिए 25 करोड़ 42 लाख रूपये स्वीकृत किए गए है। इन योजनाओं के तहत कर्मचारियों के वेतन-भत्ते, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं का भुगतान और मशीन/फर्नीचर/वाहनों का संधारण किया जाता है। #JansamparkMP CM Madhya Pradesh

Satna, Madhya Pradesh | Jul 14, 2026

MORE NEWS

#सफलता_की_कहानी
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महिला एवं बाल विकास विभाग की संवेदनशील पहल
डेढ़ वर्ष बाद दिव्यांग बालक का परिवार से हुआ पुनर्मिलन
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        सतना 22 जुलाई 2026/यह कहानी एक ऐसे मानसिक रूप से दिव्यांग बालक की है जो अपने परिवार से बिछड़ गया था और लंबे समय तक उसकी पहचान एवं परिवार की खोज एक बड़ी चुनौती बनी रही। अंततः महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति एवं संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से इस बालक का उसके परिवार से सफल पुनर्मिलन संभव हो सका। 7 जनवरी 2025 को एक आम नागरिक द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी गई कि एक दिव्यांग बालक अपने परिजनों से बिछड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई सतना द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए बालक का रेस्क्यू किया गया और बाल कल्याण समिति सतना के आदेशानुसार उसे रीवा स्थित बाल गृह में देखरेख एवं संरक्षण हेतु आश्रय दिलाया गया। बालक अपनी पहचान के रूप में “रवीश कुमार” (परिवर्तित नाम) बताता था, किंतु उसके द्वारा दी गई जानकारी अपूर्ण होने के कारण उसके परिवार तक पहुंच पाना अत्यंत कठिन साबित हो रहा था। बाल कल्याण समिति, पुलिस प्रशासन एवं साइबर सेल के सहयोग से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई।
       इस दौरान बालक का आधार पंजीयन दो बार कराया गया, जो तकनीकी कारणों से निरस्त हो गया। इसके पश्चात संस्था द्वारा बालक का जन्म प्रमाण-पत्र तैयार कराया गया तथा आवश्यक वैधानिक दस्तावेज संकलित कर पुनः आधार नामांकन कराया गया। इस प्रक्रिया के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि बालक का आधार पहले से ही जारी है। लगातार प्रयासों के बाद आधार संख्या प्राप्त की गई, जिससे यह तथ्य उजागर हुआ कि बालक का वास्तविक नाम “दिनेश कुमार” (परिवर्तित नाम) है। यही जानकारी परिवार तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी बनी। आधार विवरण के आधार पर संबंधित ग्राम के सरपंच एवं सचिव के सहयोग से बालक के परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। वीडियो कॉल के माध्यम से बालक एवं उसके परिवार की पहचान सुनिश्चित की गई। पहचान की पुष्टि होते ही बालक के माता-पिता, भाई-बहन एवं दादा बाल गृह पहुंचे। करीब डेढ़ वर्ष बाद अपने पुत्र को सामने देखकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। पूरा परिवार भावुक होकर बालक से लिपट गया। परिवारजनों ने बताया कि वे लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे थे और विभिन्न स्थानों, यहां तक कि प्रयागराज तक खोजबीन कर चुके थे। 21 जुलाई 2026 को बाल कल्याण समिति सतना के आदेशानुसार बालक को उसके परिवार की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। विदाई के समय बालक ने बाल गृह में रह रहे बच्चों एवं स्टाफ से भावुक होकर विदा ली, जो यह दर्शाता है कि उसे वहां परिवार जैसा स्नेह, सुरक्षा एवं अपनापन मिला था। परिवार ने इस पुनर्मिलन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं बाल गृह के प्रति आभार व्यक्त किया।

#JansamparkMP 
CM Madhya Pradesh 
Dr Mohan Yadav

#सफलता_की_कहानी ---- महिला एवं बाल विकास विभाग की संवेदनशील पहल डेढ़ वर्ष बाद दिव्यांग बालक का परिवार से हुआ पुनर्मिलन ----- सतना 22 जुलाई 2026/यह कहानी एक ऐसे मानसिक रूप से दिव्यांग बालक की है जो अपने परिवार से बिछड़ गया था और लंबे समय तक उसकी पहचान एवं परिवार की खोज एक बड़ी चुनौती बनी रही। अंततः महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति एवं संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से इस बालक का उसके परिवार से सफल पुनर्मिलन संभव हो सका। 7 जनवरी 2025 को एक आम नागरिक द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी गई कि एक दिव्यांग बालक अपने परिजनों से बिछड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई सतना द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए बालक का रेस्क्यू किया गया और बाल कल्याण समिति सतना के आदेशानुसार उसे रीवा स्थित बाल गृह में देखरेख एवं संरक्षण हेतु आश्रय दिलाया गया। बालक अपनी पहचान के रूप में “रवीश कुमार” (परिवर्तित नाम) बताता था, किंतु उसके द्वारा दी गई जानकारी अपूर्ण होने के कारण उसके परिवार तक पहुंच पाना अत्यंत कठिन साबित हो रहा था। बाल कल्याण समिति, पुलिस प्रशासन एवं साइबर सेल के सहयोग से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई। इस दौरान बालक का आधार पंजीयन दो बार कराया गया, जो तकनीकी कारणों से निरस्त हो गया। इसके पश्चात संस्था द्वारा बालक का जन्म प्रमाण-पत्र तैयार कराया गया तथा आवश्यक वैधानिक दस्तावेज संकलित कर पुनः आधार नामांकन कराया गया। इस प्रक्रिया के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि बालक का आधार पहले से ही जारी है। लगातार प्रयासों के बाद आधार संख्या प्राप्त की गई, जिससे यह तथ्य उजागर हुआ कि बालक का वास्तविक नाम “दिनेश कुमार” (परिवर्तित नाम) है। यही जानकारी परिवार तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी बनी। आधार विवरण के आधार पर संबंधित ग्राम के सरपंच एवं सचिव के सहयोग से बालक के परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। वीडियो कॉल के माध्यम से बालक एवं उसके परिवार की पहचान सुनिश्चित की गई। पहचान की पुष्टि होते ही बालक के माता-पिता, भाई-बहन एवं दादा बाल गृह पहुंचे। करीब डेढ़ वर्ष बाद अपने पुत्र को सामने देखकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। पूरा परिवार भावुक होकर बालक से लिपट गया। परिवारजनों ने बताया कि वे लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे थे और विभिन्न स्थानों, यहां तक कि प्रयागराज तक खोजबीन कर चुके थे। 21 जुलाई 2026 को बाल कल्याण समिति सतना के आदेशानुसार बालक को उसके परिवार की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। विदाई के समय बालक ने बाल गृह में रह रहे बच्चों एवं स्टाफ से भावुक होकर विदा ली, जो यह दर्शाता है कि उसे वहां परिवार जैसा स्नेह, सुरक्षा एवं अपनापन मिला था। परिवार ने इस पुनर्मिलन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं बाल गृह के प्रति आभार व्यक्त किया। #JansamparkMP CM Madhya Pradesh Dr Mohan Yadav

Satna, Madhya Pradesh | Jul 23, 2026

नैक मान्यता प्राप्त एकेएस विश्वविद्यालय ने रोजगारपरक शिक्षा की दिशा में बढ़ाया कदम, उद्योगों से जुड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रम युवाओं के लिए खोलेंगे करियर के नए द्वार
सतना। तेजी से बदलते औद्योगिक और तकनीकी परिवेश में पारंपरिक डिग्रियां अब अकेले रोजगार की गारंटी नहीं रहीं। उद्योग ऐसे युवाओं की तलाश में हैं, जिनके पास विषयगत ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, आधुनिक तकनीकों की समझ और कार्यस्थल का अनुभव भी हो। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नैक मान्यता प्राप्त एकेएस विश्वविद्यालय, सतना ने उद्योगों के सहयोग से अनेक अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार के लिए पूर्णतः सक्षम बनाना है।
विश्वविद्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप तैयार किए गए ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल कक्षागत शिक्षा तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली, अत्याधुनिक तकनीकों, व्यावसायिक दक्षताओं और कार्य संस्कृति से भी परिचित कराते हैं। इससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी और उन्हें देश-विदेश के प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे।
पत्रकार वार्ता में बताया गया कि विश्वविद्यालय ने यूनिवर्सल केबल्स लिमिटेड के सहयोग से बी.टेक./एम.टेक./सर्टिफिकेट इन केबल एंड वायर टेक्नोलॉजी, इंडो जर्मन टूल रूम के सहयोग से बी.टेक. इन टूल इंजीनियरिंग, थिंक साइबर प्रो के सहयोग से बी.टेक. एवं बीसीए इन साइबर सिक्योरिटी तथा बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (बीओएटी), वेस्टर्न रीजन, मुंबई के सहयोग से बी.एससी. इन हेल्थ केयर मैनेजमेंट, बी.एससी. इन इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स, बी.कॉम. इन बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस (बीएफएसआई), बीबीए इन इवेंट मैनेजमेंट, बीबीए इन रियल एस्टेट एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट तथा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा एवं बी.टेक. इन डेयरी टेक्नोलॉजी जैसे अनेक व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं।
इन पाठ्यक्रमों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षण व्यवस्था है। इसके अंतर्गत विद्यार्थी अध्ययन के साथ ही उद्योगों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इससे उन्हें वास्तविक कार्यानुभव, आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के उपयोग, समस्या समाधान, टीम भावना, समयबद्ध कार्य संस्कृति तथा व्यावसायिक अनुशासन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। यही अनुभव उन्हें रोजगार बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और अध्ययन पूर्ण होने के साथ ही बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगा।
विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार इन पाठ्यक्रमों का विकास एनसीवीईटी, यूजीसी, सीआरआईएसपी तथा मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया है। इनके संचालन एवं गुणवत्ता की सतत निगरानी संबंधित संस्थाओं और औद्योगिक सहयोगी प्रतिष्ठानों द्वारा की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त हो सके।
पत्रकार वार्ता में करियर परामर्श, लक्ष्य निर्धारण, रोजगार पूर्व प्रशिक्षण, उद्योग–शिक्षा समन्वय, कौशल विकास, उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान की संभावनाओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विंध्य क्षेत्र सहित देशभर के युवाओं को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो उन्हें केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि कुशल, आत्मनिर्भर, नवाचारोन्मुख और उद्योगों की पहली पसंद बनने योग्य पेशेवर बनाए।
पत्रकार वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति इंजी. अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रो. बी. ए. चोपड़े, प्रति कुलपति डॉ. हर्षवर्धन, कुलसचिव प्रो. आर. एस. त्रिपाठी, विपणन प्रमुख अविनाश मिश्रा, विधि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. सुधीर कुमार जैन, प्राध्यापक प्रो. एल. एन. शर्मा तथा विश्वविद्यालय परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

नैक मान्यता प्राप्त एकेएस विश्वविद्यालय ने रोजगारपरक शिक्षा की दिशा में बढ़ाया कदम, उद्योगों से जुड़े व्यावसायिक पाठ्यक्रम युवाओं के लिए खोलेंगे करियर के नए द्वार सतना। तेजी से बदलते औद्योगिक और तकनीकी परिवेश में पारंपरिक डिग्रियां अब अकेले रोजगार की गारंटी नहीं रहीं। उद्योग ऐसे युवाओं की तलाश में हैं, जिनके पास विषयगत ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल, आधुनिक तकनीकों की समझ और कार्यस्थल का अनुभव भी हो। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए नैक मान्यता प्राप्त एकेएस विश्वविद्यालय, सतना ने उद्योगों के सहयोग से अनेक अप्रेंटिसशिप एम्बेडेड व्यावसायिक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों को अध्ययन के साथ उद्योगों में व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें रोजगार के लिए पूर्णतः सक्षम बनाना है। विश्वविद्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया गया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप तैयार किए गए ये पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को केवल कक्षागत शिक्षा तक सीमित नहीं रखते, बल्कि उन्हें उद्योगों की वास्तविक कार्यप्रणाली, अत्याधुनिक तकनीकों, व्यावसायिक दक्षताओं और कार्य संस्कृति से भी परिचित कराते हैं। इससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी और उन्हें देश-विदेश के प्रतिष्ठित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में बेहतर अवसर प्राप्त होंगे। पत्रकार वार्ता में बताया गया कि विश्वविद्यालय ने यूनिवर्सल केबल्स लिमिटेड के सहयोग से बी.टेक./एम.टेक./सर्टिफिकेट इन केबल एंड वायर टेक्नोलॉजी, इंडो जर्मन टूल रूम के सहयोग से बी.टेक. इन टूल इंजीनियरिंग, थिंक साइबर प्रो के सहयोग से बी.टेक. एवं बीसीए इन साइबर सिक्योरिटी तथा बोर्ड ऑफ अप्रेंटिसशिप ट्रेनिंग (बीओएटी), वेस्टर्न रीजन, मुंबई के सहयोग से बी.एससी. इन हेल्थ केयर मैनेजमेंट, बी.एससी. इन इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स, बी.कॉम. इन बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज एंड इंश्योरेंस (बीएफएसआई), बीबीए इन इवेंट मैनेजमेंट, बीबीए इन रियल एस्टेट एंड प्रॉपर्टी मैनेजमेंट तथा पॉलिटेक्निक डिप्लोमा एवं बी.टेक. इन डेयरी टेक्नोलॉजी जैसे अनेक व्यावसायिक एवं रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ किए हैं। इन पाठ्यक्रमों की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षण व्यवस्था है। इसके अंतर्गत विद्यार्थी अध्ययन के साथ ही उद्योगों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे। इससे उन्हें वास्तविक कार्यानुभव, आधुनिक उपकरणों और तकनीकों के उपयोग, समस्या समाधान, टीम भावना, समयबद्ध कार्य संस्कृति तथा व्यावसायिक अनुशासन का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। यही अनुभव उन्हें रोजगार बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और अध्ययन पूर्ण होने के साथ ही बेहतर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध होगा। विश्वविद्यालय प्रबंधन के अनुसार इन पाठ्यक्रमों का विकास एनसीवीईटी, यूजीसी, सीआरआईएसपी तथा मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया है। इनके संचालन एवं गुणवत्ता की सतत निगरानी संबंधित संस्थाओं और औद्योगिक सहयोगी प्रतिष्ठानों द्वारा की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त हो सके। पत्रकार वार्ता में करियर परामर्श, लक्ष्य निर्धारण, रोजगार पूर्व प्रशिक्षण, उद्योग–शिक्षा समन्वय, कौशल विकास, उच्च शिक्षा तथा अनुसंधान की संभावनाओं पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। विश्वविद्यालय का उद्देश्य विंध्य क्षेत्र सहित देशभर के युवाओं को ऐसी शिक्षा उपलब्ध कराना है, जो उन्हें केवल डिग्रीधारी नहीं, बल्कि कुशल, आत्मनिर्भर, नवाचारोन्मुख और उद्योगों की पहली पसंद बनने योग्य पेशेवर बनाए। पत्रकार वार्ता के दौरान विश्वविद्यालय के प्रति कुलाधिपति इंजी. अनंत कुमार सोनी, कुलपति प्रो. बी. ए. चोपड़े, प्रति कुलपति डॉ. हर्षवर्धन, कुलसचिव प्रो. आर. एस. त्रिपाठी, विपणन प्रमुख अविनाश मिश्रा, विधि संकाय के अधिष्ठाता डॉ. सुधीर कुमार जैन, प्राध्यापक प्रो. एल. एन. शर्मा तथा विश्वविद्यालय परिवार के अन्य वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे।

Raghurajnagar Nagareey, Satna | Jul 23, 2026

सतना,सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्र इकठ्ठा होकर सिविल लाइन चौक में प्रदर्शन किया

सतना,सोनम वांगचुक के समर्थन में छात्र इकठ्ठा होकर सिविल लाइन चौक में प्रदर्शन किया

Raghurajnagar Nagareey, Satna | Jul 23, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को जल्द और कठोर सजा दिलाने के लिए देशभर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। संबंधित विभागों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कदम छात्रों के हितों की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पेपर लीक के दोषियों को जल्द और कठोर सजा दिलाने के लिए देशभर में फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। संबंधित विभागों और अधिकारियों को सभी आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कदम छात्रों के हितों की सुरक्षा और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए उठाया गया है।

Raghurajnagar Nagareey, Satna | Jul 23, 2026

ये वीडियो देखिए, आपके आँखों में आँसू आ जायेंगे। अगर इस जज़्बे के साथ देश भर से युवा दिल्ली पहुँच रहे हों, तो इस आंदोलन को दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती।

ये वीडियो देखिए, आपके आँखों में आँसू आ जायेंगे। अगर इस जज़्बे के साथ देश भर से युवा दिल्ली पहुँच रहे हों, तो इस आंदोलन को दुनिया की कोई ताक़त नहीं रोक सकती।

Raghurajnagar Nagareey, Satna | Jul 23, 2026