#सफलता_की_कहानी
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महिला एवं बाल विकास विभाग की संवेदनशील पहल
डेढ़ वर्ष बाद दिव्यांग बालक का परिवार से हुआ पुनर्मिलन
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सतना 22 जुलाई 2026/यह कहानी एक ऐसे मानसिक रूप से दिव्यांग बालक की है जो अपने परिवार से बिछड़ गया था और लंबे समय तक उसकी पहचान एवं परिवार की खोज एक बड़ी चुनौती बनी रही। अंततः महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति एवं संबंधित संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से इस बालक का उसके परिवार से सफल पुनर्मिलन संभव हो सका। 7 जनवरी 2025 को एक आम नागरिक द्वारा चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर सूचना दी गई कि एक दिव्यांग बालक अपने परिजनों से बिछड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई सतना द्वारा तत्काल कार्यवाही करते हुए बालक का रेस्क्यू किया गया और बाल कल्याण समिति सतना के आदेशानुसार उसे रीवा स्थित बाल गृह में देखरेख एवं संरक्षण हेतु आश्रय दिलाया गया। बालक अपनी पहचान के रूप में “रवीश कुमार” (परिवर्तित नाम) बताता था, किंतु उसके द्वारा दी गई जानकारी अपूर्ण होने के कारण उसके परिवार तक पहुंच पाना अत्यंत कठिन साबित हो रहा था। बाल कल्याण समिति, पुलिस प्रशासन एवं साइबर सेल के सहयोग से लगातार प्रयास किए गए, लेकिन प्रारंभिक स्तर पर कोई सफलता प्राप्त नहीं हुई।
इस दौरान बालक का आधार पंजीयन दो बार कराया गया, जो तकनीकी कारणों से निरस्त हो गया। इसके पश्चात संस्था द्वारा बालक का जन्म प्रमाण-पत्र तैयार कराया गया तथा आवश्यक वैधानिक दस्तावेज संकलित कर पुनः आधार नामांकन कराया गया। इस प्रक्रिया के दौरान यह महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई कि बालक का आधार पहले से ही जारी है। लगातार प्रयासों के बाद आधार संख्या प्राप्त की गई, जिससे यह तथ्य उजागर हुआ कि बालक का वास्तविक नाम “दिनेश कुमार” (परिवर्तित नाम) है। यही जानकारी परिवार तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी बनी। आधार विवरण के आधार पर संबंधित ग्राम के सरपंच एवं सचिव के सहयोग से बालक के परिजनों से संपर्क स्थापित किया गया। वीडियो कॉल के माध्यम से बालक एवं उसके परिवार की पहचान सुनिश्चित की गई। पहचान की पुष्टि होते ही बालक के माता-पिता, भाई-बहन एवं दादा बाल गृह पहुंचे। करीब डेढ़ वर्ष बाद अपने पुत्र को सामने देखकर माता-पिता की आंखों से खुशी के आंसू बह निकले। पूरा परिवार भावुक होकर बालक से लिपट गया। परिवारजनों ने बताया कि वे लंबे समय से उसकी तलाश कर रहे थे और विभिन्न स्थानों, यहां तक कि प्रयागराज तक खोजबीन कर चुके थे। 21 जुलाई 2026 को बाल कल्याण समिति सतना के आदेशानुसार बालक को उसके परिवार की सुपुर्दगी में सौंप दिया गया। विदाई के समय बालक ने बाल गृह में रह रहे बच्चों एवं स्टाफ से भावुक होकर विदा ली, जो यह दर्शाता है कि उसे वहां परिवार जैसा स्नेह, सुरक्षा एवं अपनापन मिला था। परिवार ने इस पुनर्मिलन के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड हेल्पलाइन एवं बाल गृह के प्रति आभार व्यक्त किया।
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CM Madhya Pradesh
Dr Mohan Yadav
2 views | Satna, Madhya Pradesh | Jul 23, 2026