
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के मोहखेड़ क्षेत्र में स्थित देवगढ़ किला गोंड शासन की ऐतिहासिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। किले के अवशेषों में कचहरी विशेष महत्व रखती है। मध्य प्रदेश सरकार भी देवगढ़ किले के अवशेषों में दरबार हॉल का उल्लेख करती है।
कचहरी वह स्थान माना जाता है, जहां राजा दरबार लगाकर प्रजा की समस्याएं सुनते और प्रशासनिक मामलों पर निर्णय लेते थे। उपलब्ध स्थानीय ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, कचहरी में एक ऊंचा मंच था, जिस पर राजा और दरबारी बैठते थे, जबकि सामने प्रजा अपनी समस्याएं प्रस्तुत करती थी।
कभी जहां राजकीय फैसलों और जनसुनवाई की गतिविधियां होती होंगी, आज वहां मुख्यतः पुराने स्थापत्य के अवशेष दिखाई देते हैं। पत्थरों की संरचना और किले की प्राकृतिक स्थिति उस दौर की स्थापत्य एवं प्रशासनिक व्यवस्था की झलक देती है।
देवगढ़ किले की खासियत केवल उसकी कचहरी नहीं है। यहां नक्कारखाना, मोती टांका, प्राचीन मंदिर और किले की प्राचीरों के अवशेष भी मौजूद हैं। यह किला पहाड़ी और गहरी घाटी से घिरा होने के कारण प्राकृतिक रूप से भी विशिष्ट था। अगली पोस्ट में हम आपको और भी रोचक फोटोज दिखाएंगे।
कचहरी को देखकर आज भी कल्पना की जा सकती है कि सदियों पहले इसी स्थान पर राजा के सामने अपनी फरियाद लेकर लोग पहुंचते होंगे—और यहीं से देवगढ़ राज्य के प्रशासन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते होंगे।