
टांडा मेडिकल कॉलेज में पार्किंग के नाम पर मनमानी वसूली पर उपभोक्ता न्यायालय का फैसला ठेकेदार को पड़ा जुर्माना ।
जिला कांगड़ा के टांडा हस्पताल में कई वर्षों से तीमारदारों और मरीजों से वाहन पार्क करने के नाम पर भारी भरकम शुल्क लिए जा रहे थे । जिस पर अधिवक्ता अभिषेक पाधा ने उपभोक्ता न्यायालय में शिकायत की थी । टांडा मेडिकल कॉलेज में पार्किंग शुल्क के नाम पर कथित मनमानी वसूली के खिलाफ अधिवक्ता अभिषेक पाधा द्वारा दायर जनहित शिकायत पर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, कांगड़ा ने कड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है । इस मामले में कोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है । कोर्ट ने पार्किंग शुल्क की मनमानी पर रोक लगाते हुए पुरानी दरें लागू करने के आदेश दिये हैं । वहीं 20 लाख रेड क्रॉस को, 2 लाख पुलिस को और शिकायतकर्ता को मुआवजा व मुकदमा खर्च भी देने की बात की है । आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि निर्धारित दरों से अधिक पार्किंग शुल्क वसूलना स्वीकार्य नहीं होगा ।
अब यही रहेंगी पार्किंग दरें:
दोपहिया वाहन: 4 घंटे तक 5 रुपए, उससे अधिक के लिए 10 रुपए ।
चारपहिया वाहन: 4 घंटे तक 10 रुपए, उससे अधिक 20 रुपए ।
वहीं हाथ से लिखी रसीद अब नहीं चलेगी । पार्किंग ठेकेदार को इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस से रसीद जारी करनी होगी, जिसमें वाहन नंबर और प्रवेश का समय दर्ज होगा । इसके साथ ही पार्किंग की हर 15 दिन में जांच, सही रसीद, कर्मचारियों के व्यवहार और सफाई व्यवस्था की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं ।
सबसे बड़ा आदेश: विपक्षी पक्षों को ₹20 लाख जिला रेड क्रॉस सोसाइटी, कांगड़ा में जमा करने होंगे, जिसका इस्तेमाल केवल गरीब मरीजों की आर्थिक मदद के लिए किया जाएगा । पार्किंग ठेकेदार को ₹2 लाख पुलिस अधीक्षक कांगड़ा के पास जमा करने होंगे । इस राशि का इस्तेमाल हेलमेट वितरण और सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिए किया जाएगा । आयोग ने पार्किंग क्षेत्र को दो महीने के भीतर पक्का करने, उचित लाइनिंग और सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के भी निर्देश दिए हैं । ब्लड डोनर, लंगर सेवा, एंबुलेंस और मेडिकल कॉलेज के निर्माण कार्य में लगी गाड़ियों के लिए पार्किंग निशुल्क रहेगी ।
भविष्य में पार्किंग शुल्क बढ़ाना भी आसान नहीं होगा । इसके लिए सामाजिक-आर्थिक प्रभाव, लागत-लाभ, पार्किंग क्षमता, वाहनों की संख्या, पीक आवर्स और मरीजों, तीमारदारों, डॉक्टरों व स्टाफ सहित विभिन्न श्रेणियों के उपयोगकर्ताओं का विस्तृत अध्ययन करना होगा और सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेनी होगी ।
यह फैसला सिर्फ पार्किंग शुल्क पर नहीं, बल्कि अस्पताल आने वाले मरीजों और तीमारदारों के अधिकारों पर भी बड़ा संदेश माना जा रहा है ।
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