
हड़ताल का 11वां दिन, चौक-चौराहों पर लगे गंदगी के अंबार, दुकानदारों का धंधा मंदा, 18 अगस्त तक नहीं उठेंगे कचरे के ढेर
कर्मचारी नेता बोले : आजादी के 80 साल बाद भी गुलामों जैसा बर्ताव
फतेहाबा।
सफाई कर्मचारियों की राज्यव्यापी ह़ताल रविवार को 11वें दिन में प्रवेश कर गई। 11 दिन से सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप्प रहने के कारण शहरवासी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हो गए हैं। शहर के हर चौक-चौराहों, मुख्य बाजारों और गली-मोहल्लों के नुक्कड़ों पर गंदगी के बड़े-बड़े ढेर लग चुके हैं। सड़ांध और भयंकर दुर्गंध के कारण लोगों का सांस लेना तक मुहाल हो चुका है। बाजारों में गंदगी के चलते दुकानदारों का कामकाज ठप्प होकर रह गया है और सडक़ों पर लोगों की आवाजाही भारी गिरावट आई है।
हड़ताल के 11वें दिन नगर परिषद कार्यालय परिसर में कर्मचारियों का धरना जारी रहा। इससे पूर्व स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर सर्व कर्मचारी संघ के पूर्व जिला प्रधान बेगराज एवं ब्लॉक सचिव ओम प्रकाश लोट द्वारा ध्वजारोहण किया गया। झंडारोहण के तुरंत बाद एक विशाल विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता इकाई प्रधान नरेश राणा व अग्निशमन इकाई प्रधान विनोद खिचड़ ने संयुक्त रूप से की, जबकि मंच संचालन ओम प्रकाश लोट व सतवीर सारण द्वारा किया गया। विचार गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता इकाई प्रधान नरेश राणा, जिला प्रधान विजय ढाका, वीरू रत्ती, खेत मजदूर यूनियन के उपाध्यक्ष राम कुमार बबुलपुरिया, एसकेएस जिला सचिव रामनिवास शर्मा, नागरिक अधिकार मंच से राजीव सेतिया व दुष्यंत शर्मा, रिटायर्ड कर्मचारी संघ से सुभाष चौहान, शाहनवाज एडवोकेट, पार्षद मोहनलाल नारंग, रिटायर्ड पुलिस वेलफेयर एसोसिएशन के उप प्रधान रणधीर, ज्ञान विज्ञान समिति से संदीप महिया, किसान सभा से पताराम ढाणी ईसर और नौजवान सभा से पवन व संदीप ने सरकार को जमकर घेरा।
वक्ताओं ने कहा कि देश की आजादी में वाल्मीकि समाज के वीरों का अमूल्य योगदान रहा है, लेकिन बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज 80 साल बाद भी स्वदेशी सरकारें सफाईकर्मियों से गुलामों जैसा बर्ताव कर रही हैं। शहर को बीमारियों से बचाने वाले कर्मचारियों को जब उनके जायज हक मांगे जाते हैं, तो सरकार तानाशाही रवैये पर उतर आती है।
18 अगस्त तक नहीं उठेगा कचरा
कर्मचारी नेताओं ने दोटूक कहा कि ठेका प्रथा बंद करने, कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने, अग्निकांड में शहीद कर्मचारियों के परिवारों को न्याय देने, ग्रेच्युटी लागू करने और 17 सूत्रीय मांगों पर पहले सहमति बनने के बावजूद सरकार अपनी बात से मुकर रही है। अब 18 अगस्त तक बढ़ी हड़ताल: सरक