
रामनगर में परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा कैंडल मार्च निकालकर दिल्ली में पीजी की ईमारत ढहने के कारण मारे गये छात्रों एवं अन्य नागरिकों को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की, और निजीकरण की नीतियों के कारण देश की बदहाल हो चुकी शिक्षा व्यवस्था को इस दुःखद घटना की मुख्य वजह बताया।
कैंडल मार्च के दौरान शहीद पार्क, लखनपुर चौक पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि निजीकरण की नीतियों ने देश में शिक्षा की सरकारी व्यवस्था को बर्बाद कर दिया है। भयंकर बेरोजगारी के इस दौर में छोटे शहरों, कस्बों और गाँवों से छात्र अच्छी शिक्षा पाने और भविष्य के सपनों के साथ महानगरों की ओर रुख करने पर मज़बूर हैं।
इसका फायदा उठाते हुये इन महानगरों में किरायजीवी माफिया छात्रों को बुरी तरह लूट-खसोट रहे हैं, क्योंकि बाहर से आने वाले छात्रों के लिये कॉलेजों में हॉस्टलों की संख्या बहुत ही कम है। राजधानी दिल्ली में पढ़ रहे कई लाख छात्रों पर हॉस्टलों की संख्या मात्र कुछ हज़ार है।
वक्ताओं ने कहा कि असल में ये कोई दुर्घटना नहीं बल्कि शिक्षा की बदहाल व्यवस्था और भ्रष्ट तंत्र द्वारा की गई हत्यायें हैं। वक्ताओं ने इस घटना में मारे गये छात्रों एवं अन्य नागरिकों के परिजनों को एक-एक करोड़ रु. मुआवजा दिये जाने एवं सभी के एक परिजन को सरकारी नौकरी दिये जाने की मांग की।
कैंडल मार्च में परिवर्तनकामी छात्र संगठन के रवि कुमार, राजेंद्र, प्रीति छिम्वाल, प्रीति आर्य, हिना, वैभव, दीपाली व लवली; इंकलाबी मज़दूर केंद्र के रोहित रुहेला व भुवन चंद्र, उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के प्रभात ध्यानी, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की गीता देवी एवं देवभूमि व्यापार मंडल के मनमोहन अग्रवाल इत्यादि लोगों ने भागीदारी की।
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