
#Jaipur_Rural: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 (1)
यह धारा संगठित अपराध (Organised Crime) की परिभाषा से संबंधित है।
संगठित अपराध क्या है: यदि कोई व्यक्ति अकेले या संयुक्त रूप से, किसी संगठित अपराध सिंडिकेट (गैंग/समूह) के सदस्य के रूप में या उसकी ओर से कोई निरंतर गैरकानूनी गतिविधि (Continuing unlawful activity) करता है, तो वह इस धारा के तहत आता है।
शामिल गतिविधियाँ: इसमें अपहरण, डकैती, वाहन चोरी, जबरन वसूली (रंगदारी), भूमि हड़पना, सुपारी/संविदा हत्या (Contract killing), आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, मानव तस्करी (वेश्यावृत्ति या फिरौती के लिए), तथा मादक पदार्थों, हथियारों या अवैध वस्तुओं/सेवाओं की तस्करी शामिल हैं।
मुख्य उद्देश्य: इन गतिविधियों का मकसद प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई आर्थिक लाभ, संपत्ति या अन्य फायदा हासिल करना होता है।
प्रमुख सजा के प्रावधान (धारा 111 के तहत)
✓ मृत्यु होने पर:- यदि संगठित अपराध के कारण किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो अपराधी को मृत्युदंड (फाँसी) या आजीवन कारावास दिया जाएगा और कम से कम ₹10 लाख का जुर्माना होगा।
✓ अन्य मामलों में:- यदि मृत्यु नहीं होती है, तो कम से कम 5 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और कम से कम ₹5 लाख का जुर्माना हो सकता है।
✓ साजिश या गिरोह का हिस्सा होना:- संगठित अपराध की साजिश रचने, मदद करने या गिरोह का सदस्य होने पर भी 5 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा मिलती है।
✓ संपत्ति जब्ती:- अपराध से अर्जित संपत्ति (Proceeds of crime) को जब्त करने का भी प्रावधान है।
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