
*देवतालाब में मोहन-मोदी की डबल इंजन सरकार ने किया कलंकित कार्य, राष्ट्रीय प्रचारक विश्वमित्र ने पगड़ी छोड़, शिखा खोलकर लिया सरकारों के खात्मे का 'चाणक्यी संकल्प', शंकराचार्य से मुरादाबाद में ली विशेष आशीष*
*मऊगंज/देवतालाब:* मऊगंज जिले के देवतालाब से सनातन संस्कृति, गौवंश की सुरक्षा और प्रशासनिक तानाशाही को लेकर एक बेहद आक्रोशित करने वाला और व्यवस्था को हिला देने वाला मामला सामने आया है। गौमाता को राष्ट्रमाता बनाने, गौवध के हिंसामयी पापाचार से देश को उबारकर शहीदी अरमानों और शहीद भाई राजीव दीक्षित के सपनों का गौ-आधारित सनातन भारत पुनः बनाने के पुनीत लक्ष्य को लेकर 'देश बचाओ आध्यात्मिक राष्ट्रीय पुनर्जागरण अभियान' द्वारा एक विशाल आयोजन किया जाना था। जगतपिता जगदीश्वर द्वारा संरक्षित और निर्देशित इस अभियान के तहत, शहीद केदारनाथ व शहीद भाई राजीव दीक्षित की पावन स्मृति में देवतालाब जिला मऊगंज में आगामी १२ जून से १५ जून तक भव्य गौकथा का आयोजन सुनिश्चित हुआ था। लेकिन सूबे की मोहन सरकार और केंद्र की मोदी सरकार की तथाकथित 'डबल इंजन सरकार' ने इस पवित्र गौकथा को अनुमति न देकर एक ऐसा कलंकित और सनातन विरोधी कार्य किया है, जिससे पूरे क्षेत्र के सनातनी भक्तों और गौ-प्रेमियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सरकार के इस घोर तानाशाही और दमनकारी रवैये के विरोध में अभियान के राष्ट्रीय प्रचारक एवं पूर्व शासकीय शिक्षक विश्वमित्र ने अब आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। गौमाता के अपमान और कथा पर लगी रोक से आहत होकर परम त्यागी विश्वमित्र ने अपने सिर से सम्मान की पगड़ी और मंगल वस्त्रों को त्याग दिया है, तथा अपनी शिखा (चोटी) को खोलकर इन 'गौमर्दनी' (गौवंश का दमन करने वाली) सरकारों का समूल खात्मा करने और देश में सच्ची 'गौ-बर्धनी' सरकार स्थापित करने का ईश-इच्छित बलिदानी 'चाणक्यी सत्याग्रही संकल्प' ले लिया है। इस ऐतिहासिक और उग्र संकल्प की लिखित सूचना देने और आगे की रणनीति तय करने के लिए 'देश बचाओ आध्यात्मिक राष्ट्रीय पुनर्जागरण अभियान' के राष्ट्रीय प्रचारक विश्वमित्र ने आज दिनांक २६ जून २०२६ को बिलारी, मुरादाबाद में अपनी 'गविष्ठ यात्रा' के दौरान पधारे परमपूज्य शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज से साक्षात मुलाकात की। विश्वमित्र ने शंकराचार्य जी के चरणों में अपना संकल्प पत्र सौंपकर इस धर्म युद्ध के लिए विशेष मार्गदर्शन, आशीष और निर्देशों का अनुरोध किया है। गौकथा पर प्रतिबंध लगाकर खुद को सनातनी बताने वाली सरकार अब पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है, और मुरादाबाद से लेकर मऊगंज के देवतालाब तक इस चाणक्यी संकल्प ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भारी हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह होगा कि संतों के इस आक्रोश के सामने झुककर प्रशासन अपनी गलती सुधारता है या फिर यह आंदोलन इस डबल इंजन सरकार के पतन का कारण बनता है।
Mauganj, Rewa | Jun 26, 2026