
बड़ी ख़बर: अकाल तख्त ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को घोषित किया 'गुरु दोखी', सिख समुदाय से सोशल बॉयकॉट की अपील...
#अमृतसर / चंडीगढ़: सिख समुदाय की सर्वोच्च धार्मिक गद्दी अकाल तख्त ने एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता भगवंत मान को 'सिख विरोधी' और 'गुरु दोखी' (खालसा पंथ विरोधी) घोषित कर दिया है. अकाल तख्त के जत्थेदार ने देश-विदेश की सिख संगत से अपील की है कि वे मुख्यमंत्री मान का पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार (बॉयकॉट) करें और उन्हें मुंह न लगाएं. यह पूरा विवाद एक कथित वीडियो और हाल ही में पास हुए बेअदबी कानून को लेकर भड़का है.
विवाद की मुख्य वजह: क्या है पूरा मामला?
अकाल तख्त द्वारा भगवंत मान के खिलाफ इस बड़े एक्शन के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आ रहे हैं:
1. कथित आपत्तिजनक वीडियो और फॉरेंसिक जांच आरोप:
हाल ही में भगवंत मान का एक करीब एक साल पुराना कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. आरोप है कि इस वीडियो में वह सिख गुरु साहिब और जरनैल सिंह भिंडरावाले की तस्वीर पर शराब छिड़कते और भद्दी गालियां देते दिखाई दे रहे थे.
मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है. मुख्यमंत्री का कहना है कि यह वीडियो पूरी तरह से AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और डीपफेक तकनीक के जरिए तैयार किया गया है. AAP ने सवाल उठाया कि इस बात का क्या प्रमाण है कि वीडियो में दिख रहा शख्स वास्तव में भगवंत मान ही है?
अकाल तख्त का दावा: अकाल तख्त ने 'आप' के दावों को नकारते हुए कहा कि इस वीडियो की बकायदा फॉरेंसिक जांच कराई गई है. जांच में पुष्टि हुई है कि वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी और भगवंत मान ने गुरुओं का अपमान किया था. इसी आधार पर 15 जून को उन्हें सजा सुनाई गयी.
2. अप्रैल 2026 का 'बेअदबी कानून' और अकाल तख्त की नाराजगी: विवाद की दूसरी बड़ी वजह पंजाब सरकार द्वारा हाल ही में पास किया गया एक कानून है. अप्रैल 2026 में भगवंत मान सरकार ने बेअदबी से जुड़ा एक सख्त कानून विधानसभा में पास किया था. अकाल तख्त का आरोप है कि मान सरकार ने इतने संवेदनशील और सिखों के धार्मिक मामलों से जुड़े कानून को बनाने से पहले सिख समुदाय के शीर्ष धार्मिक नेतृत्व, गुरुओं या संतों से कोई परामर्श नहीं किया. सजा का ऐलान करते हुए अकाल तख्त ने केवल मुख्यमंत्री भगवंत मान पर ही कार्रवाई नहीं की, बल्कि पूरी सरकार को लपेटे में ले लिया है. अकाल तख्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए आदेश जारी किया है:
"जिन भी सिख विधायकों (चाहे वे किसी भी दल के हों) ने अप्रैल में बेअदबी से जुड़े इस विवादित कानून पर हस्ताक्षर किए थे या इसका समर्थन किया था, वे सभी आगामी 29 जून को अकाल तख्त की सर्वोच्च गद्दी के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश हों और अपनी स्थिति स्पष्ट करें."
पंजाब की सियासत और धार्मिक गलियारों में इस फैसले के बाद भूचाल आ गया है. अकाल तख्त के इस कड़े रुख के बाद आम आदमी पार्टी और भगवंत मान सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि पंजाब की राजनीति में अकाल तख्त के आदेशों का बहुत बड़ा सामाजिक और राजनीतिक असर होता है. अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री और उनके विधायक 29 जून के इस अल्टीमेटम पर क्या कदम उठाते हैं.
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Chapra, Saran | Jun 16, 2026