
लालगंज का पावन शृंगी ऋषि आश्रम:--
वैशाली की पावन धरती पौराणिक और ऐतिहासिक धरोहरों से भरी हुई है। ऐसा ही एक परम पवित्र और ऐतिहासिक स्थल हमारे वैशाली जिले के लालगंज में प्रखंड कार्यालय से पश्चिम पवित्र नारायणी (गंडक) नदी के किनारे स्थित है—शृंगी ऋषि आश्रम।
रामायण काल के महान अलौकिक तपस्वी महर्षि शृंगी की इस तपोभूमि का इतिहास बहुत गौरवशाली है।
धार्मिक मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार जनकपुर (मिथिला धाम) जाने के क्रम में महर्षि विश्वामित्र, प्रभु श्री राम और भ्राता लक्ष्मण के साथ लालगंज स्थित ऐतिहासिक श्रृंगी ऋषि आश्रम में पधारे थे।
यह स्थान न केवल हमारी सनातनी संस्कृति का प्रतीक है, बल्कि रामायण काल के गौरवशाली इतिहास को खुद में समेटे हुए है। कालचक्र और समय के थपेड़ों के कारण वह ऐतिहासिक स्थल पर बने हुए यह आश्रम क्षतिग्रस्त होगया था। बिलकुल जर्जर हालत हो गया था, मूर्ति भी खंडित हो गई थी, जिससे स्थानीय श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों के मन में गहरी टीस थी। लंबे समय तक इस धरोहर को अपने जीर्णोद्धार का इंतजार था।
इस ऐतिहासिक उपेक्षा को दूर करने और जन-जन की आस्था को सम्मान देने का लालगंज के वर्तमान विधायक संजय कुमार सिंह ने अपने व्यक्तिगत एवं पुरजोर प्रयासों से इस पवित्र आश्रम की गरिमा को वापस लौटाने का काम किया। क्षतिग्रस्त हो चुकी पुरानी मूर्ति के स्थान पर पूर्ण पुनर्निर्माण करा कर महर्षि शृंगी की नवीन और अत्यंत आकर्षक मूर्ति को स्थापित कराया है।
आज लालगंज का यह शृंगी ऋषि आश्रम नारायणी नदी के शांत किनारे पर अपनी नई आभा के साथ देश-दुनिया के श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। यह न सिर्फ हमारी आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, बल्कि हमारे गौरवशाली इतिहास का जीता-जागता प्रतीक भी है।
इस अमूल्य सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की जरूरत है।