क्या बंटी यादव की ह"त्या सिर्फ एक ह"त्या थी,या किसी बड़े नेटवर्क के खिलाफ उठी आवाज़ को हमेशा के लिए खामोश करने की कोशिश...?
देह व्यापार के कथित नेटवर्क का भंडाफोड़ करने और उसके खिलाफ आवाज़ उठाने के बाद बंटी यादव का अपहरण कर उनकी ह"त्या कर दी गई......!
साथ ही यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पटना रेलवे स्टेशन पर खुलेआम महिलाओं की खरीद-फरोख्त जैसी गतिविधियाँ होती हैं, लेकिन डर और दबाव के कारण कोई खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं करता......!
यदि इन आरोपों में सच्चाई है,तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी निष्पक्ष,पारदर्शी व तेज़ जांच होनी चाहिए,दोषी चाहे कोई भी हो,उसे कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए......!
सवाल सिर्फ बंटी यादव का नहीं,बल्कि उस व्यवस्था का है जहाँ सच बोलने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित होनी चाहिए.....!
पिछले कुछ समय में बिहार में कानून व्यवस्था लचर दिखाई पड़ी है.....! मानो अपराधियों में कानून का भय ना हो?
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