
*डुप्लीकेट चाबी से 75 लाख रुपये का डंपर चोरी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश एवं वृद्ध महिला से लूट करने वाली गैंग का खुलासा करने वाली पुलिस टीम सम्मानित*
*दो बड़ी वारदातों का खुलासा करने वाली पुलिस टीम सम्मानित सराहनीय कार्य के लिए जिला विशेष टीम एवं साइबर सेल के पुलिसकर्मियों को पुलिस अधीक्षक ने प्रशंसा पत्र देकर किया सम्मानित*
चित्तौड़गढ़, 30 सितंबर 2026। जिला पुलिस द्वारा अपराधों की रोकथाम एवं गंभीर वारदातों के त्वरित खुलासे के लिए किए जा रहे प्रयासों के तहत जिला विशेष टीम (चोरी निरोधक टीम) एवं साइबर सेल की टीमों द्वारा दो महत्वपूर्ण मामलों में उल्लेखनीय सफलता हासिल की गई। पुलिस टीमों ने तकनीकी साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज एवं ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर एक ओर जहां करीब 75 लाख रुपये मूल्य के न्यू डंपर की चोरी के मामले में अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर चोरी का डंपर बरामद किया, वहीं दूसरी ओर वृद्ध महिला से चांदी के आभूषण लूटने वाली अंतरराज्यीय गैंग का पर्दाफाश कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया तथा गैंग द्वारा की गई 30 से अधिक वारदातों का खुलासा किया।
दोनों प्रकरणों में पुलिस टीम द्वारा किए गए उत्कृष्ट, मेहनत एवं सराहनीय कार्य को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र सिंह ने जिला विशेष टीम (चोरी निरोधक टीम) एवं साइबर सेल के पुलिसकर्मियों को प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा उनके कार्य की सराहना की।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि गंभीर एवं संगठित अपराधों के खुलासे में पुलिस टीम द्वारा आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण तथा मानवीय सूचना तंत्र का प्रभावी उपयोग किया गया। पुलिसकर्मियों की लगातार मेहनत, सतर्कता एवं टीम भावना के परिणामस्वरूप दोनों मामलों में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को भविष्य में भी इसी प्रकार पूर्ण निष्ठा एवं समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रोत्साहित किया।
*75 लाख रुपये के डंपर चोरी प्रकरण में महत्वपूर्ण सफलता*
राशमी थाना क्षेत्र के पहुना स्थित नायरा पेट्रोल पंप के बाहर से करीब 75 लाख रुपये कीमत का न्यू डंपर डुप्लीकेट चाबी लगाकर चोरी करने के मामले में जिला विशेष टीम एवं राशमी थाना पुलिस द्वारा घटना के खुलासे के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई की गई।
पुलिस टीम ने घटनास्थल से लेकर नीमच, मंदसौर, जावरा, गोधरा एवं आनंद (गुजरात) तक 350 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग का गहन विश्लेषण किया। तकनीकी साक्ष्य एवं ह्यूमन इंटेलिजेंस के आधार पर संदिग्ध आरोपियों की पहचान की गई तथा लगातार निगरानी एवं रेकी की गई।