
बाघ के हमले में मृत विजय हालदार की पत्नी को वन विभाग ने सौंपा 10 लाख का मुआवजा
एसीएफ शशि भूषण सिंह ने अन्ना देवी को दिया सहायता राशि का चेक, परिवार को हरसंभव सहयोग का भरोसा
बगहा/वाल्मीकिनगर। वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) वन प्रमंडल-2 के भेड़िहारी वन प्रक्षेत्र अंतर्गत भेड़िहारी गांव में बाघ के हमले में जान गंवाने वाले किसान विजय हालदार के परिवार को वन विभाग ने शुक्रवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। वन विभाग की ओर से मृतक की पत्नी अन्ना देवी को अनुग्रह सहायता राशि का चेक सौंपा गया। इस दौरान अधिकारियों ने शोक संतप्त परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए भविष्य में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया। शुक्रवार की सुबह एसीएफ शशि भूषण सिंह ने मृतक की पत्नी अन्ना देवी को 10 लाख रुपये का चेक प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वन्यजीवों के हमले में जान गंवाने वाले लोगों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। पीड़ित परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत त्वरित राहत देने के लिए आवश्यक कागजी प्रक्रिया पूरी कर सहायता राशि उपलब्ध कराई गई है। ज्ञात हो कि बीते 15 अगस्त को विजय हालदार, पिता हरि हालदार, गांव के समीप अपने गन्ने के खेत में घास काट रहे थे। इसी दौरान जंगल की ओर से निकले बाघ ने उन पर हमला कर दिया। हमले में विजय हालदार गंभीर रूप से घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद भेड़िहारी समेत आसपास के गांवों में दहशत और आक्रोश का माहौल बन गया था। ग्रामीणों ने मृतक के शव को बगहा-वाल्मीकिनगर मुख्य मार्ग पर रखकर प्रदर्शन किया था और बाघ के आतंक से निजात दिलाने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग उठाई थी। चेक वितरण के दौरान ईडीसी अध्यक्ष संतोष काजी, रामविलास यादव समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ईको विकास समिति के अध्यक्ष संतोष काजी ने ग्रामीणों से जंगल से सटे क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि ग्रामीण अकेले खेत या जंगल की ओर जाने से बचें और बाघ अथवा किसी अन्य वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना दें। ग्रामीणों ने वन विभाग की ओर से समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की सराहना की। साथ ही जंगल से सटे गांवों में बाघ की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए निगरानी व्यवस्था और मजबूत करने, नियमित गश्त बढ़ाने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि मुआवजा परिवार के लिए तत्काल आर्थिक सहारा है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए वन क्षेत्र से लगे गांवों में सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाना जरूरी है।