
इंडियन एक्सप्रेस अखबार ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव आयोग द्वारा लिए गए फैसलों और जारी किए गए आदेशों को लेकर 10 महीनों में 14 बार औपचारिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज करवाई. रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने फैसलों को लेकर उन्हें अंधेरे में रखे जाने की शिकायत की थी.
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद विपक्षी दलों और नेताओं ने मुख्य चुनाव आयोग ज्ञानेश कुमार पर मनमर्जी चलाने का आरोप लगाया है. भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इन शिकायतों से साफ होता है कि तीन सदस्यों वाले चुनाव आयोग में सिर्फ ज्ञानेश कुमार की चल रही है. ”
आरजेडी सांसद मनोज कुमार झा ने लिखा, “जब मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर स्वयं निर्वाचन आयोग के भीतर से बार-बार आपत्तियां दर्ज हों, तो मामला केवल प्रशासनिक असहमति का नहीं रह जाता, यह लोकतंत्र के मूल आधार पर सवाल है.”
टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने लिखा, “कथित तौर पर एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के लिए लाखों मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करना हमारे लोकतंत्र की नींव पर ही प्रहार है. इसके लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.” आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने लिखा, “मोदी ने 'लोकप्रियता' से नहीं 'लूटप्रियता' से चुनाव जीता है.”
चुनाव आयोग की ओर से इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है.