
पांवटा की सियासत में गुरदीप सिंह गैरी के नाम की चर्चा तेज, क्या सामाजिक सेवा से राजनीति की ओर बढ़ रहा नया चेहरा?
पांवटा साहिब। पांवटा साहिब की राजनीति में इन दिनों एक नाम सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों तक चर्चा में है—सरदार गुरदीप सिंह गैरी। सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाले गैरी को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
गुरदीप सिंह गैरी को मार्च 2026 में ऑल इंडिया सैनी समाज की पांवटा साहिब ब्लॉक इकाई का सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना गया था। इसके बाद से सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता लगातार दिखाई दे रही है। अगस्त में आयोजित सैनी युवा सम्मेलन की अध्यक्षता भी उन्होंने की थी।
सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी और सेवा गतिविधियों के चलते उनके नाम की चर्चा अब राजनीति के साथ भी जुड़ने लगी है। हाल ही में विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी और भूमिका को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं देखने को मिल रही हैं।
हालांकि, गुरदीप सिंह गैरी स्वयं चुनाव लड़ने की बात से फिलहाल दूरी बनाते हैं। उनका कहना है कि चुनाव लड़ना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन राजनीति को समाजसेवा का एक माध्यम माना जा सकता है। उनका मुख्य उद्देश्य लोगों की सेवा करना है और पांवटा साहिब के लोगों के लिए काम करना ही उनकी प्राथमिकता है।
गैरी का कहना है कि वह भाजपा के साथ हमेशा कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं। आने वाले समय में राजनीतिक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं और क्या समीकरण बनते हैं, उस समय के अनुसार ही आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
सैनी समाज की भूमिका भी चर्चा में
पांवटा साहिब की राजनीति में सामाजिक समीकरणों की अपनी अहम भूमिका रहती है। ऐसे में सैनी समाज के बीच गुरदीप सिंह गैरी की सक्रियता को भी राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है। हालांकि, किसी समुदाय के मतदाताओं की संख्या या किसी संभावित उम्मीदवार के समर्थन को लेकर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस समय उपलब्ध नहीं है।
दूसरी ओर, भाजपा संगठन की ओर से 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मौजूदा विधायक सुखराम चौधरी के नाम को लेकर स्पष्ट बयान सामने आ चुके हैं। ऐसे में गैरी के नाम की चर्चा ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है। पांवटा साहिब विधानसभा क्षेत्र के मौजूदा विधायक सुखराम चौधरी भाजपा से हैं।
अब बड़ा सवाल यही है कि आने वाले समय में पांवटा की राजनीति किस दिशा में जाती है? क्या सामाजिक सेवा से सक्रिय यह चेहरा भविष्य में राजनीतिक भूमिका निभाएगा, या फिर यह केवल सामाजिक गतिविधियों तक ही सीमित रहेगा?
फिलहाल इतना जरूर है कि गुरदीप सिंह गैरी का नाम पांवटा साहिब की स्थानीय चर्चाओं में तेजी से उभर रहा है। आगे की तस्वीर राजनीतिक परिस्थितियों, संगठन के फैसलों और स्वयं गैरी की भूमिका से ही साफ होगी।