
क्या दूसरी दुनिया के आसमान में पानी मिलना, एलियंस की तरफ पहला इशारा हो सकता है?
करीब 7 साल पहले वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की, जिसने इस सवाल को फिर जिंदा कर दिया।
13 सितंबर 2019 को हबल स्पेस टेलीस्कोप के डेटा से वैज्ञानिकों को K2-18 b नाम के एक दूर के ग्रह के वातावरण में जलवाष्प के संकेत मिले।
सबसे खास बात यह थी कि K2-18 b अपने तारे के हैबिटेबल ज़ोन में है। यानी वह इलाका जहाँ तापमान कुछ परिस्थितियों में इतना सही हो सकता है कि ग्रह की सतह पर तरल पानी मौजूद रह सके।
यह ग्रह पृथ्वी से करीब 110 प्रकाशवर्ष दूर है और इसका द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 8 गुना है। इसे 2015 में केपलर स्पेस टेलीस्कोप ने खोजा था।
वैज्ञानिकों ने हबल के 2016 और 2017 के पुराने डेटा को दोबारा खंगाला। जब ग्रह अपने तारे के सामने से गुजरता है, तो तारे की रोशनी उसके वातावरण से होकर आती है। इसी रोशनी में पानी के अणुओं की खास निशानी दिखाई दी।
लेकिन यहाँ सबसे जरूरी ट्विस्ट है—पानी के संकेत मिलने का मतलब यह बिल्कुल नहीं कि वहाँ जीवन मिल गया है।
K2-18 b पृथ्वी जैसा ग्रह है या फिर नेप्च्यून जैसा गैसीय संसार, यह अभी पूरी तरह साफ नहीं है। इसके आसपास का लाल बौना तारा भी काफी सक्रिय है, जिससे वहाँ का माहौल जीवन के लिए मुश्किल हो सकता है।
फिर भी यह खोज इसलिए रोमांचक है क्योंकि बाद की जेम्स वेब टेलीस्कोप observations में इसके वातावरण में मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे molecules के संकेत भी मिले।
तो सवाल अब भी वहीं है—क्या इतनी दूर किसी दूसरी दुनिया पर जीवन के लिए सही परिस्थितियाँ मौजूद हो सकती हैं?
आपको क्या लगता है—क्या इंसान को किसी दिन पृथ्वी के बाहर जीवन का पक्का सबूत मिलेगा?
ओरिजन सोर्स: नासा और नेचर एस्ट्रोनॉमी
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Bihar, India | Sep 13, 2026