सौरभ भार्गव को कमजोर समझने की भूल मत करना… वक्त ने भले ही उनके सामने मुश्किलें खड़ी की हों, लेकिन मुश्किलें हौसले को नहीं तोड़तीं, बल्कि इरादों को और मजबूत करती हैं। झूठे षड्यंत्रों और बेबुनियाद आरोपों से किसी की पहचान मिटाई नहीं जा सकती। जिन लोगों ने आज सवाल खड़े किए हैं, उन्हें वक्त आने पर उन्हीं सवालों के जवाब भी सुनने पड़ेंगे। सौरभ भार्गव आज भी अपने दम पर खड़े हैं और कल भी अपने दम पर खड़े रहेंगे। आलोचना करने वालों को इतना जरूर समझ लेना चाहिए कि किसी के खिलाफ माहौल बनाना आसान है, लेकिन सच के सामने टिकना आसान नहीं। वक्त हर चेहरे से नकाब उतारता है और हर साजिश का सच सामने लाता है। सौरभ भार्गव को गिराने की कोशिश करने वाले शायद यह भूल गए हैं कि संघर्ष से निकला इंसान टूटता नहीं, और मजबूत होकर लौटता है। आज जो लोग उनकी कमजोरी गिन रहे हैं, कल वही उनकी वापसी की ताकत देखेंगे।