
नित्या सिंघल की पुस्तक 'हीलिंग एट होम- नित्या के नुस्खे' का थर्ड स्पेस में हुआ विमोचन
प्रकृति, परंपरा और आत्म-देखभाल की ओर लौटने का आमंत्रण है "हीलिंग एट होम"
उदयपुर. आईआईएम कोझिकोड से स्नातकोत्तर तथा देश के प्रतिष्ठित औद्योगिक परिवारों से ताल्लुक रखने वाली नित्या सिंघल की नवीन पुस्तक "हीलिंग एट होम" का विमोचन रविवार को थर्ड स्पेस में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिक, चिकित्सा जगत के विशेषज्ञ, उद्योगपति तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियाँ उपस्थित थीं।
लेखिका नित्या सिंघल ने पुस्तक के महत्वपूर्ण अंशों का सारगर्भित विवेचन किया। उन्होंने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य और उपचार की वास्तविक शुरुआत अस्पतालों से नहीं, बल्कि घर से होती है। हमारी रसोई, हमारी जीवनशैली और हमारी दैनिक आदतें ही स्वस्थ जीवन की सबसे मजबूत नींव हैं।
नित्या ने कहा कि "हीलिंग एट होम" प्रकृति, परंपरा और आत्म-देखभाल की उस भारतीय जीवन संस्कृति में ले जाती है, जिसे कथित आधुनिक जीवन की भागदौड़ में हम धीरे-धीरे पीछे छोड़ते जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यह पुस्तक केवल घरेलू नुस्खों का संकलन नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, आयुर्वेदिक ज्ञान और प्रकृति की उपचार शक्ति पर आधारित एक समग्र जीवन-दर्शन है। पुस्तक में माइग्रेन, साइनस, सर्दी-जुकाम, अस्थमा, कब्ज, एसिडिटी, मधुमेह, रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल, जोड़ों का दर्द, अनिद्रा, बाल झड़ना, दांतों की समस्याएँ, प्रतिरोधक क्षमता, डेंगू और निमोनिया सहित 30 से अधिक सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं के लिए घरेलू एवं प्राकृतिक उपायों का उल्लेख किया गया है।
नित्या ने कहा कि पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता उपचार बताना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति सोच को रचनात्मक व सुधारात्मक बनाना है।
नित्या सिंघल के अनुसार आज का समाज त्वरित समाधान का आदी हो चुका है, जबकि प्रकृति आधारित उपचार धैर्य, अनुशासन और निरंतरता मांगते हैं।
विमोचन कार्यक्रम में प्रसिद्ध उद्योगपति दिलीप खेमका, अरविंद सिंघल, नमिता खेमका, गौरांग सिंघल तथा आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. दीक्षा भावसार ने पुस्तक पर अपने विचार व्यक्त किए।
संयोजन कनिका सांघी और भुवनेश्वरी शक्तावत ने किया। स्वास्थ्य परिचर्चा का संचालन एवं समन्वय श्रद्धा मुर्डिया ने किया।
कार्यक्रम में शहर व भारत भर से आए गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।