
लंबित मुकदमे के आधार पर चरित्र प्रमाण पत्र से इनकार नहीं, हाईकोर्ट का सख्त फैसला
#उरई
जालौन। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति के विरुद्ध केवल आपराधिक मुकदमा लंबित होने के आधार पर उसका चरित्र प्रमाण पत्र (Character Certificate) जारी करने से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों को कानून के अनुरूप निर्णय लेना होगा, न कि केवल लंबित मुकदमे को आधार बनाकर नागरिकों के अधिकारों से वंचित करना।
मामला जालौन के तत्कालीन जिला मजिस्ट्रेट द्वारा आईपीसी की धारा 323, 504 एवं 506 के तहत लंबित मुकदमे का हवाला देकर चरित्र प्रमाण पत्र का आवेदन निरस्त किए जाने से जुड़ा था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि उसने आवेदन में कोई तथ्य नहीं छिपाया था और बाद में संबंधित मुकदमे में बरी भी हो चुका है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के पूर्व निर्णय अनिल कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य तथा सुप्रीम कोर्ट के अवतार सिंह बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए तर्क रखा कि केवल लंबित मुकदमा किसी व्यक्ति को चरित्र प्रमाण पत्र से वंचित करने का वैध आधार नहीं हो सकता।
न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया एवं न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने माना कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त कानूनी आधार के आवेदन खारिज किया। न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने कोई तथ्य नहीं छिपाया था, इसलिए आवेदन निरस्त करना न्यायसंगत नहीं था।
हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट, जालौन का आदेश निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप में चरित्र प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया और याचिका स्वीकार कर ली। सूत्रो के अनुसार कोतवाली उरई के लिपिक महोदय किसी का तो बना देते लेकिन किसी का बनाने से इंकार कर देते है। आदेश उन लोगो के लिए मिल का पत्थर साबित होगा जिन्हे प्राईवेट संस्था कम्पनी मे नौकरी तथा विश्व विद्यालय मे दाखिला ले सकेंगे ।
Orai, Jalaun | Aug 5, 2026