छत्तीसगढ़ के बस्तर में कुपोषण दर राज्य गठन के समय के 52% से घटकर अब 17% पर आ गई है, जो कागज़ों पर एक बड़ी राहत दिखती है। लेकिन इस सिक्के का दूसरा पहलू बेहद डरावना है। आज भी ज़िले के 13,700 से अधिक मासूम कुपोषण के साए में जीने को मजबूर हैं। बस्तानार, दरभा और बकावंड जैसे ब्लॉक सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं, वहीं पड़ोसी ज़िले सुकमा में 57% बच्चों का कुपोषित होना इस पूरे आदिवासी अंचल की ज़मीनी हकीकत बयां करता है।
अधिकारियों और ज़मीनी रिपोर्टों से स्पष्ट है कि केवल पोषण आहार बांटना इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। बस्तर में मलेरिया, जलजनित संक्रमण और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बच्चों को बार-बार गंभीर कुपोषण (SAM) और बौनेपन की ओर धकेल रही है। जब तक पोषण के साथ-साथ बुनियादी स्वास्थ्य सेवाएं, स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता को लेकर एकीकृत रणनीति नहीं बनेगी, तब तक बस्तर के नौनिहालों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो सकता।
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