
#पंजाब_विधानसभा_चुनाव2027
क्या पंजाब चुनाव में नशा बनेगा सबसे बड़ा मुद्दा? हालिया घटनाओं ने बढ़ाई सियासी सरगर्मी
संगरिया की आवाज़।
पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति बनाना शुरू कर दिया है। इसी बीच प्रदेश में एक बार फिर से नशे का मुद्दे चुनावी बहस के केंद्र में आ गया है। पिछले दिनों नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की हत्या की गई। इसके बाद आम आदमी पार्टी सरकार पर विपक्ष गंभीर आरोप लगाए है। वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार अपनी कार्रवाई और एंटी-ड्रग अभियान का हवाला दे रही है।
वहीं पंजाब दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की है। ऐसे में सवाल है कि क्या नशा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बन सकता है?
हालिया घटनाओं ने क्यों बढ़ाई चिंता?
मानसा में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह झोटा की हत्या
मानसा में 13 अक्टूबर को मानसा में एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि एक मेडिकल स्टोर पर झोटा का नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।
इस मामले की जांच भगवंत मान सरकार ने सीबीआई को सौंप दी है। वहीं पंजाब दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की।
गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह की हत्या पर भी उठे सवाल
15 अक्टूबर को बटाला के पास मारी पनवां गांव में बिक्रमजीत सिंह की हत्या हुई। इस घटना पर पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि नशा तस्करी का विरोध करने पर बिक्रमजीत की हत्या की गई है। वहीं इस मामले जांच भी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) करेगी। मंगलवार को अमित शाह ने बिक्रमजीत सिंह के परिवार से मुलाकात की।
संगरूर में चिट्टे की शिकायत के बाद गुलजार सिंह की मौत
दरअसल, सितंबर महीने में दिरबा क्षेत्र के गुलजार सिंह ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में नशे की उपलब्धता को लेकर सवाल उठाए थे। इसके बाद उनकी जहर खाने से मौत हो गई। इस घटना के बाद प्रदेश सरकार पर विपक्ष द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए। मामले में परिवार की ओर से भी दवाब और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
बता दें कि इन सभी घटनाओं ने प्रदेश में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।
क्या नशे के खिलाफ सरकारी अभियान जमीन पर असर दिखा रहा है?
नशे के खिलाफ भगवंत मान सरकार ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ और 'बिग 5' एक्शन प्लान के तहत राज्यव्यापी अभियान चला रही है। वहीं पंजाब पुलिस के 6 अक्टूबर 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, सरकार के एंटी-ड्रग अभियान के दौरान-
#विवरण_आंकड़े
दर्ज FIR 64,598
गिरफ्तार कथित तस्कर 82,739
जब्त हेरोइन 4,198 किलोग्राम
जब्त ड्रग मनी ₹22.58 करोड़
स्रोत: पंजाब पुलिस के एंटी-ड्रग अभियान के आंकड़े, 6 अक्टूबर 2026 तक।
पुलिस के ये आंकड़े बड़े पैमाने पर कार्रवाई की तस्वीर पेश करते है। लेकिन दूसरी तरफ गांवों में नशे की उपलब्धता को लेकर शिकायतें और हालिया घटनाएं सरकार के सामने अलग चुनौती पेश कर रही है।
नशे के मुद्दे पर किस पार्टी का क्या रुख है?
आम आदमी पार्टी (AAP)
वर्तमान में प्रदेश में आम आदमी पार्टी की सरकार है। राज्य सरकार द्वारा नशे के खिलाफ कई अभियान चलाए जा रहे है। इसके अलावा सरकार ने नशे के हॉटस्पॉट पर कार्रवाई, पुलिस अभियान और विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया है।
#भारतीय जनता पार्टी (BJP)
प्रदेश में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की हत्या को लेकर बीजेपी ने भगवंत मान सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए है। इसके अलावा उन्होंने सीएम मान से इस्तीफे की भी मांग की है।
आगामी चुनावों को देखते हुए सितंबर 2026 में #बीजेपी ने नशा मुक्त पंजाब यात्रा निकाली। इसके अलावा हालिया घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों से पार्टी के नेताओं ने मुलाकात की। इसके साथ ही बीजेपी ने दावा किया कि यदि आगामी चुनाव में सरकार बनती है तो प्रदेश को नशामुक्त किया जाएगा।
#कांग्रेस (Congress)
कांग्रेस ने प्रदेश में नशे की समस्या पर प्रदेश सरकार को घेरा है। वहीं सीमा पार से कथित तस्करी को लेकर केंद्र सरकार की जिम्मेदारी पर भी सवाल उठाया है। उसका तर्क है कि केवल पंजाब सरकार को निशाना बनाने के बजाय ड्रग सप्लाई नेटवर्क और सीमावर्ती इलाकों में तस्करी रोकने के उपायों पर भी चर्चा होनी चाहिए।
#शिरोमणि अकाली दल (SAD)
प्रदेश में अकाली दल ने 'मावां-धियां इंसाफ यात्रा' के जरिए नशे से प्रभावित परिवारों, खासकर महिलाओं की चिंताओं को उठाया है। पार्टी ने मौजूदा सरकार के साथ पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल पर भी सवाल किए हैं।
संगरिया की आवाज़