
**'कागजों में पेट भर रहे नौनिहाल, एसी कमरों में मलाई काट रहे अफसर! मऊगंज के काड़ी स्कूल में 2 महीने से मिड-डे मील गोल, DEO-BEO सोए, मुख्यमंत्री मोहन यादव के राज में शिक्षा तंत्र का जनाजा— संपादक दीपक कुमार गुप्ता की रिपोर्ट'**
**मऊगंज।** मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंचों से बड़ी-बड़ी डींगें हांकते हैं कि *“प्रदेश में शिक्षा का स्तर सुधर रहा है और हर गरीब बच्चे को भरपेट पोषण मिल रहा है।”* लेकिन अगर मुख्यमंत्री जी को अपने खोखले दावों का असली 'पोस्टमार्टम' देखना है, तो जरा मऊगंज जिले के **शासकीय प्राथमिक पाठशाला काड़ी (जन शिक्षा केंद्र खुटहा / संकुल केंद्र खुटहा)** का रुख कर लें! जहां पिछले **दो महीनों से न तो मासूम बच्चों के लिए एक दाना खाना बना है और न ही स्कूल ढंग से खुला है!** पीएम पोषण (मिड-डे मील) योजना के नाम पर मऊगंज जिले में किस कदर डाका डाला जा रहा है, इसका नग्न नाच काड़ी स्कूल में देखने को मिल रहा है। जब इंडिया हेडलाइन 24 की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो स्कूल की रसोइया ने ऐसा कड़वा थप्पड़ मारा कि शिक्षा विभाग के अफसरों के चेहरे लाल हो जाएंगे। रसोइया ने साफ बताया कि पिछले **दो महीनों से सामग्री (राशन, तेल, मसाले) ही नहीं सप्लाई की गई!** जब राशन ही नहीं आया, तो चूल्हा कैसे जलता? सवाल यह उठता है कि दो महीनों तक जो राशन कागजों में बांटे जाना दिखाया गया, उसका लाखों रुपया किसकी जेब में गया? क्या बीआरसी, बीओ और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) मिलकर मासूम बच्चों के निवाले की मलाई आपस में बांटकर खा रहे हैं? याद कीजिए, अभी कुछ दिन पहले ही इंडिया हेडलाइन 24 के संपादक दीपक कुमार गुप्ता ने दोपहर (लाइव फोटो और टाइमिंग के साथ) इसी काड़ी स्कूल के मुख्य दरवाजे पर लटकता हुआ बड़ा सा लोहे का ताला पूरे देश को दिखाया था। हफ्तों-महीनों तक स्कूल नहीं खुलता, मासाब घर बैठे-बैठे बैंकों से सरकारी तनख्वाह डकारते हैं। लेकिन अचरज की बात देखिए कि इतने बड़े सबूत के बावजूद **जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)** और **ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO)** के कान पर जूं तक नहीं रेंगी! आखिर इन मासाबों और भ्रष्ट अफसरों ने इस स्कूल को क्या अपने बाप की निजी जागीर समझ रखा है? जब इस पूरे घपले और रसोइया के बयान पर **बीआरसी (BRC)** से फोन पर बात की गई, तो बीआरसी साहब बगलें झांकते नजर आए। रसोइया से बात करने की हिम्मत तक नहीं जुटा पाए और सिर्फ एक ही घिसा-पिटा dialogue बोल दिया— *"हम जांच करके कार्रवाई करेंगे।"* अरे बीआरसी साहब, 2 महीने से बच्चे भूखे पेट तड़प रहे हैं, स्कूल बंद पड़ा है, तब आपकी 'जांच' कौन सी रजाई में सो रही थी? क्या मऊगंज कलेक्टर महोदय भी सिर्फ एसी कमरों में बैठकर फाइलों पर दस्तखत करने के लिए बैठे हैं? इतने बड़े घोटाले के बाद भी कलेक्टर साहब की खामोशी यह साबित करती है कि मऊगंज का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह पंगु हो चुका है। हम प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी से सीधा सवाल पूछते हैं— क्या यही आपका 'विकसित मध्य प्रदेश' है? जहां मऊगंज जिले के गरीब और आदिवासी समाज के बच्चों के हिस्से का खाना भ्रष्ट अधिकारी और ठेकेदार मिलकर डकार जाएं? अगर आपकी सरकार में थोड़ी सी भी संवेदनशीलता बची है, तो: 1. बच्चों का खाना पचाने वाले ठेकेदारों, समूह और दोषी BRC, BEO पर **तत्काल FIR दर्ज** कराई जाए। 2. कुंभकर्णी नींद में सो रहे **जिला शिक्षा अधिकारी (DEO)** को तुरंत निलंबित कर घर बैठाया जाए। अगर इस महाघोटाले के बाद भी मऊगंज कलेक्टर और भोपाल में बैठे मुख्यमंत्री ने कोई एक्शन नहीं लिया, तो इंडिया हेडलाइन 24 इस मुद्दे को सड़क से लेकर शासन के गलियारों तक ऐसे ही बेनकाब करेगा। जब तक इन भ्रष्ट अफसरों और नेताओं की कुर्सियां पूरी तरह हिल नहीं जातीं, तब तक संपादक दीपक कुमार गुप्ता की कड़वी, तीखी और धारदार कलम बिना डरे और बिना झुके लगातार सच का आईना दिखाती रहेगी!
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Mauganj, Rewa | Sep 15, 2026