
जलवायु अनुकूल मक्का उत्पादन तकनीकी पर प्रशिक्षण का आयोजन।
दैनिक वीरधरा राजस्थान।
चित्तौड़गढ़।एशिया मक्का कार्यकम हैदराबाद द्वारा प्रायोजित तनाव-संवदेनशील कृषि पारिस्थितिकी में जलवायु अनुकूल मक्का पर किसानो के पूरे परिवार के लिए एक दिवसीय कृषक परिवार का प्रशिक्षण कृषि विज्ञान केन्द्र चित्तौडगढ पर आयोजन किया गया। जिसमें चित्तौड़गढ़ पंचायत समिति के नारेला गांव के 8 परिवारो से 20 कृषक एवं कृषक महिलाओ ने भाग लिया।
केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. रतनलाल सोलंकी ने बताया कि मक्का फसल के बीज शीघ्रता से अपनी अंकुरण क्षमता खो देते है, इसलिए ये आवश्यक है कि बोने से पूर्व बीज का अंक्रण प्रतिशत जाँच करें। बुवाई के लिए संकर किस्म 18 से 20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, कम्पोजिट किस्म 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हरे चारे के लिए 40 से 45 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है। संकर किस्मों के लिए हर साल नया बीज खरीदकर प्रयोग करें। मक्का की फसल मुख्यत खरीफ ऋतु में ली जाती है। खरीफ ऋतु में बुवाई मानसून पर निर्भर रहती है, जहां पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध रहती है वहां खरीफ में बुवाई का उपयुक्त समय मध्य जून से मध्य जुलाई के बीच में बुवाई कर देनी चाहिए। डॉ सोलंकी ने कहा कि एशिया मक्का कार्यकम हैदराबाद के अन्तर्गत 08 किसानो के यहां 5 किस्मो का 3.2 हैक्टर क्षेत्र में प्रदर्शन (ओ.एफ.टी.) हेतु मक्का का उन्नत बीज उपलब्ध कराया गया। मृदा जनित रोगों और कीट व्याधियों से बचाने के लिए बुवाई से पूर्व कवकनाशी तथा कीटनाशकों जैसे बाविस्टीन तथा कैप्टान 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज या एप्रोन 35 एसडी और इमिडाक्लोप्रिड या फिप्रोनिल 4 मिली प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित करने के बाद जैविक उर्वरको जैसे एजोस्पिरिलम, पी.एस.वी कल्चर 10 ग्राम प्रति किलोग्राम मक्का बीज का उपचार करके बुवाई करनी चाहिए।