
#मध्यप्रदेश के मंदसौर जिले में #स्वास्थ्य विभाग की आउटसोर्स भर्ती को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि सरकार से सिर्फ 66 मल्टी टास्क वर्करों के पदों की मंजूरी मिली थी, लेकिन सीएमएचओ कार्यालय से कथित तौर पर 318 लोगों को नियुक्ति दे दी गई। अतिरिक्त नियुक्तियों के लिए शासन की अनुमति और बजट स्वीकृति नहीं होने का भी आरोप है।
मामला सामने आने के बाद तत्कालीन #सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान को निलंबित कर दिया गया। निलंबन आदेश में उनके भतीजे जयदीप की भूमिका का भी जिक्र है। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि भर्ती के नाम पर अभ्यर्थियों से पैसों की मांग की गई और जयदीप द्वारा कथित तौर पर पैसों की डील किए जाने की शिकायतें सामने आईं।
मामला तब खुलना शुरू हुआ जब नियुक्त किए गए कई लोगों को कई महीनों तक वेतन नहीं मिला। इसके बाद अभ्यर्थियों और उनके परिजनों ने #कलेक्टर कार्यालय और जनप्रतिनिधियों से शिकायत की। कुछ लोगों ने नौकरी लगवाने के नाम पर लाखों रुपए दिए जाने के आरोप भी लगाए हैं।
वहीं, आउटसोर्स एजेंसी के संचालक ने कहा है कि विभाग के कहने पर नियुक्तियां की गईं और यदि एजेंसी के लेटरहेड या सील का दुरुपयोग कर अतिरिक्त नियुक्ति पत्र जारी हुए हैं तो यह गलत है। दूसरी ओर, निलंबित सीएमएचओ डॉ. गोविंद सिंह चौहान ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को निराधार बताया है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि 66 स्वीकृत पदों के बावजूद इतनी बड़ी संख्या में नियुक्तियां किसके आदेश पर हुईं और कथित पैसों के लेन-देन में किसकी भूमिका थी।
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