
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए दावा किया कि घुसपैठियों की पहचान के नाम पर शुरू की गई इस प्रक्रिया में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटने की बात सामने आई, लेकिन कितने घुसपैठियों की पहचान हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। कुरैशी ने एक अखबार में प्रकाशित जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि करीब 500 विदेशी नागरिक पाए गए थे, जिनमें 150 बांग्लादेशी बताए गए।
कुरैशी ने कहा कि SIR नाम की किसी प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख न तो संविधान में है, न जनप्रतिनिधित्व कानून में और न ही मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 में। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व कानून, 1950 में किसी निर्वाचन क्षेत्र या उसके हिस्से में गहन पुनरीक्षण की व्यवस्था है, लेकिन इसके लिए लिखित कारण बताने होते हैं। इसी आधार पर उन्होंने मौजूदा प्रक्रिया की कानूनी वैधता पर सवाल उठाए।
पूर्व CEC ने आरोप लगाया कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने पर ज्यादा जोर दिया गया, जबकि नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि यदि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम पलायन के कारण हटाए गए, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वे कहां गए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब घुसपैठियों की पहचान को इस प्रक्रिया की प्रमुख वजह बताया गया था, तो अब तक कितने घुसपैठिए पकड़े गए, इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।
कुरैशी ने अपने इंटरव्यू में कहा कि इस मुद्दे पर लगातार नाम हटाए जाने की चर्चा हुई, लेकिन नाम जोड़ने और लोगों के कथित पलायन को लेकर पर्याप्त स्पष्टता नहीं दिखाई दी। उन्होंने दावा किया कि वह लंबे समय से SIR की वैधता पर आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर भी सवाल उठाए। कुरैशी के मुताबिक, अदालत में भी यह सवाल नहीं पूछा गया कि इस प्रक्रिया के तहत कितने घुसपैठियों की पहचान हुई। उन्होंने एक अखबार में प्रकाशित आंकड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि करीब 500 विदेशी नागरिक पाए जाने की जानकारी थी, जिनमें 150 बांग्लादेशी और बाकी में नेपाल के नागरिक शामिल बताए गए थे।
कुरैशी के इस इंटरव्यू पर भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पत्रकार परवेज आलम की पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए कहा कि भारत के एक पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का लंदन में रह चुके एक पत्रकार के सामने भारत की बुराई करना अफसोसजनक है। सिब्बल ने टिप्पणी की कि इससे सबकुछ खुद ही साफ हो जाता है।
Gormi, Bhind | Oct 23, 2026